
SHREE SHARMA
1 day ago
॥श्री स्कन्द पुराणोक्त देवकृत शिवाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्॥ जब सारे देवी देवता दुःखी हुए।तो उन्होंने भगवान श्री शिवजी के १०८ नामों से यह स्तुति की। हर नाम में जय-जयकार है॥ "जय शम्भो, जय रुद्र, जय शंकर।" ॥प्रसंग: श्री स्कन्द पुराण के सह्याद्रि खण्ड में, देवताओं ने कहा :~ हे शिव जी! आप ही सबके आधार हैं। इस स्तोत्र को पढ़ने-सुनने से त्रिविध ताप, शोक और ग्रह पीड़ा दूर होती है॥ (पूरी स्तुति शुद्ध छन्द-मय स्कन्द पुराणोक्त शिव अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र । जय शम्भो विभो रुद्र स्वयम्भो जय शङ्कर । जयेश्वर जयेशान जय सर्वज्ञ कामद ॥१॥ नीलकण्ठ जय श्रीद श्रीकण्ठ जय धूर्जटे । अष्टमूर्तेऽनन्तमूर्ते महामूर्ते जयानघ ॥२॥ जय पापहरानङ्गनिःसङ्गाभङ्गनाशन । जय त्वं त्रिदशाधार त्रिलोकेश त्रिलोचन ॥३॥ जय त्वं त्रिपथाधार त्रिमार्ग त्रिभिरूर्जित । त्रिपुरारे त्रिधामूर्ते जयैकत्रिजटात्मक ॥४॥ शशिशेखर शूलेश पशुपाल शिवाप्रिय । शिवात्मक शिव श्रीद सुहृच्छ्रीशतनो जय ॥५॥ सर्व सर्वेश भूतेश गिरिश त्वं गिरीश्वर । जयोग्ररूप मीमेश भव भर्ग जय प्रभो ॥६॥ जय दक्षाध्वरध्वंसिन्नन्धकध्वंसकारक । रुण्डमालिन् कपालिंस्थं भुजङ्गाजिनभूषण ॥७॥ दिगम्बर दिशां नाथ व्योमकेश चिताम्पते । जयाधार निराधार भस्माधार धराधर ॥८॥ देवदेव महादेव देवतेशादिदैवत । वह्निवीर्य जय स्थाणो जयायोनिजसम्भव ॥९॥ भव शर्व महाकाल भस्माङ्ग सर्पभूषण । त्र्यम्बक स्थपते वाचाम्पते भो जगताम्पते ॥१०॥ शिपिविष्ट विरूपाक्ष जय लिङ्ग वृषध्वज । नीललोहित पिङ्गाक्ष जय खट्वाङ्गमण्डन ॥११॥ कृत्तिवास अहिर्बुध्न्य मृडानीश जटाम्बुभृत् । जगद्भ्रातर्जगन्मातर्जगत्तात जगद्गुरो ॥१२॥ पञ्चवक्त्र महावक्त्र कालवक्त्र गजास्यभृत् । दशबाहो महाबाहो महावीर्य महाबल ॥१३॥ अघोरघोरवक्त्र त्वं सद्योजात उमापते । सदानन्द महानन्द नन्दमूर्ते जयेश्वर ॥१४॥ एवमष्टोत्तरशतं नाम्नां देवकृतं तु ये । शम्भोर्भक्त्या स्मरन्तीह शृण्वन्ति च पठन्ति च ॥१५॥ न तापास्त्रिविधास्तेषां न शोको न रुजादयः । ग्रहगोचरपीडा च तेषां क्वापि न विद्यते ॥१६॥ श्रीः प्रज्ञाऽऽरोग्यमायुष्यं सौभाग्यं भाग्यमुन्नतिम् । विद्या धर्मे मतिः शम्भोर्भक्तिस्तेषां न संशयः ॥१७॥ ॥ इति श्रीस्कन्दपुराणे सह्याद्रिखण्डे शिवाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥ 🌺भावार्थ संक्षेप में :~ हे स्वयं उत्पन्न शम्भो, विभु, रुद्र, सर्वज्ञ, कामनाओं को पूर्ण करने वाले आपकी जय हो। हे नीलकण्ठ, श्रीकण्ठ, धूर्जटि, आठ मूर्तियों वाले, अनन्त मूर्तियों वाले आपकी जय हो॥ हे पाप हरने वाले, तीनों लोकों के आधार, त्रिलोचन, त्रिपुरारी आपकी जय हो। हे चन्द्रशेखर, शूल धारण करने वाले, पशुओं के पालक, उग्र रूप वाले, भव, भर्ग, दक्ष यज्ञ को ध्वंस करने वाले, अन्धकासुर का वध करने वाले, मुण्डमाला धारी, सर्प-चर्म भूषण, दिगम्बर, आकाश को केश में धारण करने वाले, आधार और निराधार दोनों रूप वाले आपकी जय हो। हे देवों के देव महादेव, अग्नि में वीर्य वाले, स्थाणु, अयोनिज, महाकाल, त्र्यम्बक, लिंग रूप, वृषभ ध्वज, पाँच मुख वाले, दस भुजा वाले, अघोर, सद्योजात, उमा पति - आपकी जय हो। जो भक्त् इस १०८ नाम को सुनता, पढ़ता और स्मरण करता है, उसे तीनों ताप नहीं सताते, शोक-रोग नहीं होते, ग्रह पीड़ा नहीं होती और उसे श्री, बुद्धि, आरोग्य, आयु, सौभाग्य और शिव भक्ति निश्चित प्राप्त होती है॥

Comments (2)

Rama Devi Sahu
Aug 25, 2026
जहां शिव हैं , वहां शक्ति है , जहां पार्वती है वहां प्रेम है । दोनों का संग ही जीवन का सच्चा संतुलन है। 🚩जय शिव शक्ति 🚩 Good 😊 Morning Ji 🌹

बरखा शर्मा
Aug 24, 2026
🙏🙏🙏🙏