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*हिंदी अनुवाद:* _🌸भगवान के फोटो रखने से दोष लगता है? – शांति से विचार करें..._ 🙏 _आज के समय में, कई जैन लोग त्योहार या पवित्र प्रसंग पर अलग-अलग तीर्थंकर और अधिष्ठायक-देवी-देवताओं के फोटो श्रद्धा से जैन ग्रुप में रखते हैं। वहां तक ठीक है.._ _लेकिन दुख तब होता है... जब हम अपने ही जैन भगवान तीर्थंकरों के पवित्र फोटो रखकर श्रद्धापूर्वक नमन करें, तब कुछ लोग यह बात करते हैं कि,_ _"आशातना होती है", "दोष लगता है", "पाप लगता है"..._ _अरे भाई..._ _ऐसा भ्रम पैदा करना ही सच्चा दोष है।_ _भगवान के फोटो रखने से दोष नहीं लगता... दोष तब होता है, जब उनका अपमान हो जैसे कि फोटो पर “Good Morning” या अन्य सांसारिक लिखावट लिखी जाए। वे तो तीन लोक के नाथ हैं।_ _लेकिन जब भाव से, श्रद्धा से भगवान का स्मरण करें, उनके गुणों को याद करें तब तो वह भक्ति कहलाती है।_ _उसमें न तो दोष है, न आशातना... वह तो पवित्रता है।_ _आज की पीढ़ी धर्म से दूर जा रही है।_ _कई बच्चों को 24 तीर्थंकरों के नाम भी याद नहीं हैं... लेकिन अन्य धर्मों के श्लोक फटाफट बोलते हैं, यात्राएं करते हैं... क्यों?_ _क्योंकि उनके मन में जो तस्वीरें बार-बार आती हैं वे हमारे जैन धर्म की नहीं हैं... और जब हम अपने ही भगवान के फोटो रखें तो हम ही टोक देते हैं?_ _यही सच्ची आशातना है।_ _चलो अब यह भ्रम तोड़ दें..._ _डिजिटल युग का भरपूर उपयोग करके क्यों न हम भगवान के पवित्र दर्शन से समाज को धर्ममय करें?_ _भगवान के फोटो रखो, प्रेम से नमन करो, उनके तीर्थों के दर्शन कराओ, बच्चे आकर्षित हों ऐसा करो, घर-घर में धर्म जगाओ। पाठशाला में भेजो..._ _भक्ति में शंका नहीं... श्रद्धा रखो।_ _भ्रम नहीं... सच्ची समझ फैलाओ।_

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