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Rama Devi Sahu

117 days ago

बिल्कुल नहीं! सच तो यह है कि इस महाविनाश की नींव धरती पर नहीं, बल्कि स्वर्ग में हुई एक 'चोरी' से पड़ गई थी। अगर वो घटना न होती, तो न कभी कुरुवंश तबाह होता और न ही लाखों सुहागिनों की मांग उजड़ती। आइए जानते हैं उस खौफनाक घटना का पूरा सच: 1. स्वर्ग की वो मनहूस चोरी (लालच की शुरुआत) कहानी शुरू होती है स्वर्गलोक से। महर्षि वसिष्ठ के पास एक चमत्कारी गाय थी, जिसका नाम 'नंदिनी' था। एक दिन 'आठ वसु' (देवताओं का एक समूह) अपनी पत्नियों के साथ महर्षि के आश्रम के पास से गुज़र रहे थे। उनमें से मुख्य वसु 'प्रभास' की पत्नी को वह गाय इतनी पसंद आ गई कि उसने उसे चुराने की ज़िद कर ली। पत्नी के अंधे मोह में आकर प्रभास ने बाकी 7 वसुओं के साथ मिलकर महर्षि की पवित्र गाय चुरा ली। 2. महर्षि वसिष्ठ का भयंकर श्राप जब महर्षि को इस नीच काम का पता चला, तो उनका क्रोध ब्रह्मांड की ज्वाला बन गया। उन्होंने उन आठों देवताओं को एक खौफनाक श्राप दिया— "तुम देवताओं ने इंसानों की तरह नीच लालच किया है! इसलिए तुम आठों को मृत्युलोक (धरती) पर इंसान बनकर जन्म लेना होगा और इंसानों वाली पीड़ा, दर्द और बुढ़ापा सहना होगा!" 3. गंगा से माँगा गया जीवनदान (एक खौफनाक समझौता) इंसानी जीवन के दर्द और बुढ़ापे के नाम से ही देवताओं की रूह कांप गई। वे भागते हुए माता गंगा के पास गए और गिड़गिड़ाते हुए एक बहुत ही डरावनी भीख मांगी: "हे गंगे! आप धरती पर हमारी माँ बनिए। और जैसे ही हम जन्म लें, आप तुरंत हमें पानी में डुबाकर मार दीजियेगा, ताकि हमें इंसानों की यह दर्दभरी ज़िंदगी न जीनी पड़े।" माता गंगा इस कठोर काम के लिए मान गईं। 4. राजा शांतनु का अंधा प्यार और 7 बच्चों की मौत गंगा धरती पर एक सुंदर स्त्री के रूप में आईं और हस्तिनापुर के राजा शांतनु से शादी की, लेकिन एक भयंकर शर्त पर— "मैं जो भी करूँगी, आप मुझे कभी नहीं टोकेंगे। जिस दिन आपने मुझे रोका, मैं आपको हमेशा के लिए छोड़कर चली जाऊंगी।" शांतनु ने प्यार में अंधे होकर शर्त मान ली। जैसे ही गंगा ने पहले बच्चे को जन्म दिया, शांतनु खुशी से झूम उठे। लेकिन अगले ही पल महारानी गंगा ने उस नवजात बच्चे को नदी के तेज़ बहाव में फेंक दिया! शांतनु अपनी शर्त के कारण खून के आँसू पीकर रह गए। इस तरह एक-एक करके गंगा ने अपने 7 सगे बच्चों को जन्म लेते ही पानी में डुबाकर मार डाला! (वे सातों वसु अपने श्राप से आज़ाद होकर तुरंत वापस स्वर्ग चले गए।) 5. आठवाँ बच्चा और महाभारत का जन्म! जब गंगा अपने 8वें बच्चे को नदी में फेंकने जा रही थीं, तब राजा शांतनु का सब्र टूट गया। एक पिता का दर्द फूट पड़ा और उन्होंने चिल्लाकर गंगा को रोक लिया। शर्त टूटने के कारण गंगा तो वापस स्वर्ग लौट गईं, लेकिन उस 8वें बच्चे को धरती पर छोड़ गईं। क्या आप जानते हैं यह 8वाँ बच्चा कौन था? यह बच्चा वही मुख्य अपराधी 'प्रभास' था जिसने गाय चुराने की योजना बनाई थी। महर्षि वसिष्ठ के श्राप के कारण, इस 8वें बच्चे को तुरंत मौत (मुक्ति) नहीं मिली। इसे धरती पर एक बहुत लंबा, पीड़ादायक और अपनों के ही खून से सना हुआ जीवन जीना पड़ा। यही 8वाँ बच्चा आगे चलकर हस्तिनापुर का 'भीष्म पितामह' बना! इस घटना का गहरा मनोविज्ञान (सीख): इंसान हो या देवता, कर्मों का फल हर किसी को भुगतना पड़ता है। स्वर्ग में किए गए एक पल के लालच (गाय की चोरी) ने भीष्म पितामह को धरती पर तीरों की शय्या तक पहुँचा दिया। 👇

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Comments (2)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

May 5, 2026

🙏‼️ Jai Shree Krishna ‼️🙏 Subha Ratri Jii 🙏🌹