
Rama Devi Sahu
57 days ago
🌹 *कहानी: दो तोतों की संगति* 🦜🦜 एक घने जंगल में एक बरगद के पेड़ पर एक तोती रहती थी। उसने दो बच्चों को जन्म दिया। दोनों तोते बिल्कुल एक जैसे दिखते थे, सुंदर और हरी पंखों वाले।एक दिन जब मां तोती भोजन की तलाश में बाहर गई थी, तब वहां एक भयंकर तूफान आया। तेज़ हवा के झोंकों के कारण दोनों बच्चे घोंसले से उड़कर अलग -अलग दिशाओं में जा गिरे। 🦜 *पहला तोता: -* पहला तोता एक पहाड़ी के पास गिरा, जहाँ क्रूर डाकुओं की एक गुफा थी। डाकुओं ने उस तोते को उठा लिया और एक पिंजरे में डाल दिया। वह तोता दिन-रात डाकुओं की गालियां, लूट-पाट की बातें और डराने-धमकाने वाले शब्द सुनता था। धीरे-धीरे वह भी वही भाषा सीख गया। 🦜 *दूसरा तोता:* - दूसरा तोता उड़कर कुछ दूरी पर स्थित एक शांत साधु के आश्रम में जा गिरा। आश्रम के ऋषियों ने उसे बड़े प्यार से पाला। वहां सुबह-शाम वेद मंत्रों का जाप, ईश्वर की प्रार्थना और आने वाले मेहमानों का आदर-सत्कार होता था। वह तोता मीठी वाणी और अच्छे संस्कार सीखने लगा। 🫅 *राजा की परीक्षा - :* कुछ सालों बाद, उस राज्य का राजा शिकार करते हुए उसी जंगल में रास्ता भटक गया। थककर राजा डाकुओं की गुफा के पास एक पेड़ की छांव में बैठ गया।तभी गुफा के पिंजरे से पहला तोता चिल्लाया, "पकड़ो! पकड़ो! कोई आ गया है। इसके गहने और घोड़े छीन लो! मारो इसे!"तोते की ऐसी हिंसक बातें सुनकर राजा डर गया और तुरंत अपने घोड़े पर बैठकर वहां से भाग निकला। भागते-भागते राजा साधु के आश्रम के सामने पहुंचा। उसने राहत की सांस ली और घोड़े से उतरा।तभी आश्रम के पेड़ से दूसरा तोता बहुत ही मधुर आवाज में बोला, "प्रणाम राजन! आपका आश्रम में स्वागत है। कृपया अंदर पधारिए, ठंडा जल पीजिए और विश्राम कीजिए।"राजा हैरान रह गया। उसने तोते से पूछा, "तुम बिल्कुल उसी तोते जैसे दिखते हो जो मुझे कुछ दूरी पर मिला था, लेकिन तुम्हारी वाणी में इतनी मिठास और उसमें इतना जहर क्यों है?"तोते ने मुस्कुराकर जवाब दिया, "राजन! वह मेरा सगा भाई है। लेकिन वह डाकुओं के साथ रहा, इसलिए उनकी तरह सोचना और बोलना सीख गया। मैं यहाँ साधुओं के बीच रहता हूँ, इसलिए मैं वेदों की वाणी और आदर करना सीख गया। यह सब संगति का असर है। 🔱 *हे महादेव ॥* 🔱

Comments (12)

Rama Devi Sahu
Jul 3, 2026
🌸 शुभ रात्रि - जय श्री राधा कृष्ण 🌸 रात के इस शांत प्रहर में, जब पूरी दुनिया सो रही है, आइए हम अपना मन उस परम आनंद और प्रेम के सागर में लगाएं, जो केवल हमारी लाडली जी और सांवरिया सरकार के चरणों में मिलता है। राधा राधा कृष्ण कहि, जो जन सुमिरैं नीत। तिनके कारज सिद्ध सब, मिलिहैं सांचो प्रीत॥ जो मनुष्य प्रतिदिन 'राधा-राधा' और 'कृष्ण-कृष्ण' का सुमिरन करते हैं, उनके सभी बिगड़े काम बन जाते हैं और उन्हें जीवन में सच्चे प्रेम और आनंद की प्राप्ति होती है। जब तक आँखों में कान्हा की छवि और हृदय में श्री जी का नाम न हो, तब तक यह रात अधूरी है। आइए सब कुछ उन युगल सरकार के चरणों में समर्पित करके विश्राम करें। आप को एक शांत और भक्तिमयी शुभ रात्रि! 🌹

प्रेम कुमार
Jul 3, 2026
🌹🌹 जय श्री कृष्णा राधे राधे 🌹🌹 शुभ रात्रि वंदन बहना 🌹🌹

Rama Devi Sahu
Jul 3, 2026
🙏🌹🌻!!जय श्री कृष्ण!!🌻🌹🙏 जोगनि जोग न जानई, परै प्रेम रस माहिं। डोलत मुख ऊपर लिए, प्रेम जटा की छांहि।। अर्थ: जो जीवात्मा रूपी गोपी या भक्त प्रेम में लीन है, वह योग साधना के कठिन नियमों (आसन, प्राणायाम, वैराग्य) को नहीं जानती। वह पूरी तरह से ईश्वर या प्रियतम के प्रेम रूपी रस में डूब चुकी है। वह हर समय अपने चेहरे पर एक अजीब सी मस्ती, आनंद और प्रियतम की याद लिए घूमती रहती है। जैसे योगी अपनी जटाओं की छाया में बैठते हैं, वैसे ही इस प्रेमी भक्त ने सांसारिक बंधनों को छोड़कर ईश्वर के "प्रेम रूपी जटाओं" की शीतल छाया का आश्रय ले लिया है। मुख्य संदेश: ईश्वर को पाने के लिए कठिन योग साधना, तपस्या या ढोंग की आवश्यकता नहीं है। सच्चा और निश्छल प्रेम ही ईश्वर तक पहुँचने का सबसे आसान और सबसे आनंदमयी मार्ग है। जब व्यक्ति प्रेम रस में डूब जाता है, तो उसे किसी अन्य साधना की सुध नहीं रहती। 🙏🌹🌻!!जय श्री कृष्ण!!🌻🌹🙏

Rama Devi Sahu
Jul 3, 2026
🙏🌹🌻!!जय श्री कृष्ण!!🌻🌹🙏 जोगनि जोग न जानई, परै प्रेम रस माहिं। डोलत मुख ऊपर लिए, प्रेम जटा की छांहि।। अर्थ: जो जीवात्मा रूपी गोपी या भक्त प्रेम में लीन है, वह योग साधना के कठिन नियमों (आसन, प्राणायाम, वैराग्य) को नहीं जानती। वह पूरी तरह से ईश्वर या प्रियतम के प्रेम रूपी रस में डूब चुकी है। वह हर समय अपने चेहरे पर एक अजीब सी मस्ती, आनंद और प्रियतम की याद लिए घूमती रहती है। जैसे योगी अपनी जटाओं की छाया में बैठते हैं, वैसे ही इस प्रेमी भक्त ने सांसारिक बंधनों को छोड़कर ईश्वर के "प्रेम रूपी जटाओं" की शीतल छाया का आश्रय ले लिया है। मुख्य संदेश: ईश्वर को पाने के लिए कठिन योग साधना, तपस्या या ढोंग की आवश्यकता नहीं है। सच्चा और निश्छल प्रेम ही ईश्वर तक पहुँचने का सबसे आसान और सबसे आनंदमयी मार्ग है। जब व्यक्ति प्रेम रस में डूब जाता है, तो उसे किसी अन्य साधना की सुध नहीं रहती। 🙏🌹🌻!!जय श्री कृष्ण!!🌻🌹🙏

Rama Devi Sahu
Jul 3, 2026
🙏🌹🌻!!जय श्री कृष्ण!!🌻🌹🙏 जोगनि जोग न जानई, परै प्रेम रस माहिं। डोलत मुख ऊपर लिए, प्रेम जटा की छांहि।। अर्थ: जो जीवात्मा रूपी गोपी या भक्त प्रेम में लीन है, वह योग साधना के कठिन नियमों (आसन, प्राणायाम, वैराग्य) को नहीं जानती। वह पूरी तरह से ईश्वर या प्रियतम के प्रेम रूपी रस में डूब चुकी है। वह हर समय अपने चेहरे पर एक अजीब सी मस्ती, आनंद और प्रियतम की याद लिए घूमती रहती है। जैसे योगी अपनी जटाओं की छाया में बैठते हैं, वैसे ही इस प्रेमी भक्त ने सांसारिक बंधनों को छोड़कर ईश्वर के "प्रेम रूपी जटाओं" की शीतल छाया का आश्रय ले लिया है। मुख्य संदेश: ईश्वर को पाने के लिए कठिन योग साधना, तपस्या या ढोंग की आवश्यकता नहीं है। सच्चा और निश्छल प्रेम ही ईश्वर तक पहुँचने का सबसे आसान और सबसे आनंदमयी मार्ग है। जब व्यक्ति प्रेम रस में डूब जाता है, तो उसे किसी अन्य साधना की सुध नहीं रहती। 🙏🌹🌻!!जय श्री कृष्ण!!🌻🌹🙏

Rama Devi Sahu
Jul 3, 2026
तरज़-: नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे बरसानें में बंगला देखा, बंगला राधे रानी का कितना पावन प्रेम बरसता, ठाकुर और ठाकुरानी का बरसानें में बंगला देखा, बंगला राधे रानी का बरसानें में बंगला देखा... उड़न खटोले बरसानें के, बैठ बधाई गाई हो बैठ बधाई गाई हो रह रह के वो छवि निहारी, नैंनो बीच समाई जो नैंनो बीच समाई जो धन्य हुआ है जीवन सारा, क्या रुतबा महारानी का बरसानें में बंगला देखा, बंगला राधे रानी का कितना पावन प्रेम बरसता, ठाकुर और ठाकुरानीं का बरसानें में बंगला देखा, बंगला राधे रानी का बरसानें में बंगला देखा... आंखें चार हुई तो टप टप, असुंवन धारा बह निकली असुंवन धारा बह निकली प्रेम भाव का उठा है हिलोरा,रूठी किस्मत भी बदली छूकर जैसे मुझको निकला, आंचल राधे रानी का बरसानें में बंगला देखा, बंगला राधे रानी का कितना पावन प्रेम बरसता, ठाकुर और ठाकुरानीं का बरसानें में बंगला देखा, बंगला राधे रानी का बरसानें में बंगला देखा... जन्म जन्म लहरी कृपा ही, कुंज किशोरी पाऊं मैं कुंज किशोरी पाऊं मैं बिछा रहूं इंन पद कमलों में, चरणामृत रज़ पाऊं मै तन मन हारा हाल कहूं क्या, हौश़ कहां गुण ज्ञानीं सा बरसानें में बंगला देखा, बंगला राधे रानी का बरसानें में बंगला देखा, बरसानें में बंगला देखा बरसानें में बंगला देखा...

Rama Devi Sahu
Jul 3, 2026
ज़िंदगी की परिभाषा कभी दूसरों से मत लेना, यह आपकी ज़िंदगी है इसे खुद परिभाषित करो आपके बारे में आपसे बेहतर कोई नहीं जानता....जय श्री कृष्णा जी शुभ रात्रि वंदन जी 🙏

Umesh Sharma 🌹Radhe Radhe🌹
Jul 3, 2026
Radhe Radhe 🌹🪴 good evening 🌹🌿☺️

Srikumar महाराज🇮🇳☸️
Jul 3, 2026
गोकुल मैं हैं जिनका वास गोपियो संग करे निवास देवकी यशोदा हैं जिनकी मैया ऐसे हैं हमारे कृष्ण कन्हैया❤️❤️😄

बरखा शर्मा
Jul 3, 2026
jay shree radhe krishn ji 🙏🌹
