
बद्रीप्रसादअसाटी
296 days ago
।।श्रीहरिः।। *श्रोता‒महाभारत ग्रन्थको घरमें रखना अथवा पढ़ना चाहिये या नहीं ?* *स्वामीजी‒* कोई हर्ज नहीं है । सेठजी श्रीजयदयालजी गोयन्दकाने घरमें ही महाभारतको पढ़ा है, संक्षिप्त किया है और प्रेसमें छपवाया है । यह मेरे सामनेकी बात है । इससे कोई हानि नहीं होती । अमावस्या, पूर्णिमा आदिके दिन महाभारतको पढ़नेका माहात्म्य बताया गया है । आपको वहम हो तो पहले शान्तिपर्व और अनुशासनपर्व पढ़ो, फिर शुरूसे महाभारत पढ़ो । शालग्रामशिला यस्य गृहे तिष्ठति मानद । अथवा भारतं गेहे न तं वै बाधते कलिः ॥ (स्कन्दपुराण, वैष्णव॰ २२ । १६) ‘मानद ! जिसके घरमें शालग्राम शिला अथवा महाभारतकी पुस्तक हो, उसे कलियुग बाधा नहीं दे सकता ।’ जैसे हम प्यासे मर रहे हैं और गंगाजी भी पासमें है, पर हम गंगाजीतक जायँ ही नहीं, उसका जल पीयें ही नहीं तो गंगाजी क्या करे ? ऐसे ही अनेक विलक्षण महात्मा हुए हैं, भगवान्के अनेक अवतार हुए हैं, पर हमारी मुक्ति नहीं हुई तो इसका कारण यह था कि हमने चेत नहीं किया । इसलिये अपना उद्धार करनेके लिये आपको चेत करनेकी आवश्यकता है । संसारके पदार्थ प्रारब्धसे मिलते हैं, पर परमात्माकी प्राप्ति नया काम है, जिसको आप कर सकते हैं । यह काम अपने-आप होनेवाला नहीं है, प्रत्युत लगनसे होनेवाला है । *लगन नहीं होगी तो अच्छे महात्मा मिलनेपर भी आप लाभ नहीं ले सकोगे ।* यदि एक दिन भी आप सावधान होकर भगवान्में मन लगाओ तो वह दिन वर्षभरमें आपको अलग दीखेगा ! अभी सत्संग मिला है तो इससे लाभ ले लो । ऐसा मत सोचो कि यह अवसर सदा रहेगा । जैसे सावनमें हरी-हरी घास होती है तो गधा समझता है कि यह सदा रहेगी, पर यह सदा नहीं रहेगी, ऐसे ही सत्संगका यह मौका सदा नहीं रहेगा । *श्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज* _(‘बिन्दुमें सिन्धु’ पुस्तकसे)_

Comments (1)

Rama Devi Sahu
Nov 7, 2025
🙏‼️ Om Namo Narayan Namo Namah ‼️🙏
