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Rama Devi Sahu

88 days ago

"कान्हा राजा नाम के, हुकम चले नहिं कोय।" व्याख्या: वैसे तो पूरे संसार और ब्रज के राजा भगवान श्री कृष्ण (कान्हा) कहलाते हैं, लेकिन ब्रजभूमि की यह महिमा है कि यहाँ वे केवल 'नाम मात्र' के राजा हैं। ब्रज की सीमा के भीतर स्वयं श्री कृष्ण का अपना कोई पृथक हुक्म या आदेश नहीं चलता। यहाँ उनकी सर्वशक्तिमान सत्ता भी मौन हो जाती है। "ब्रजमंडल की गली गली में राधे-राधे होय ॥" व्याख्या: ब्रजमंडल की प्रत्येक कुंज-गली, यहाँ के पशु-पक्षी, लता-द्रुम और कण-कण पर केवल और केवल श्री राधा रानी का ही शासन चलता है। यहाँ की हवाओं में, यमुना की लहरों में और हर गोपी-गोप के मुख से केवल 'राधे-राधे' की ही ध्वनि गूँजती है। स्वयं राजा कहलाने वाले कान्हा भी अपनी वंशी पर 'राधा नाम' की ही टेर लगाते हैं और उनके चरणों की रज को अपने मस्तक पर धारण करते हैं। मूल निहितार्थ यह दोहा दर्शाता है कि "ज्ञान और ऐश्वर्य के राजा" (श्री कृष्ण) को यदि कोई अपने वश में कर सकता है, तो वह केवल "शुद्ध प्रेम और भक्ति की स्वामिनी" (श्री राधा जी) हैं। ब्रज में प्रेम का साम्राज्य सर्वोपरि है, इसलिए यहाँ की वास्तविक सरकार और शासिका केवल लाड़ली जू (राधा रानी) ही हैं 🌹🌹🙏राधे राधे 🙏🌹🌹

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Comments (1)

R k jangid 

phulera Jaipur

R k jangid phulera Jaipur

Jun 3, 2026

जय श्री कृष्णा🙏