
Srikumar महाराज🇮🇳☸️
106 days ago
*नर्मदा जी की परिक्रमा - साथ-साथ चलने की साधना* नर्मदा नदी को माँ कहा गया है. इसी कारण उसकी परिक्रमा केवल यात्रा नहीं, जीवन को भीतर से बदल देने वाली साधना मानी जाती है. परिक्रमा में साधक लगभग 3,500 किलोमीटर नर्मदा जी के उद्गम अमरकंटक से उसके संगम भरूच तक, फिर विपरीत तट से वापस अमरकंटक तक पैदल चलते हैं. मार्ग में साधक नर्मदा जी को प्रणाम कर आगे बढ़ते हैं, जैसे जीवन के प्रत्येक मोड़ पर प्रकृति से संवाद हो रहा हो. जंगल, घाट, शांत तट, प्राचीन आश्रम, और साधु-संत, सब इस यात्रा के साक्षी होते हैं. *मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान 🚩*
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