MyMandirInstall
Profile

Rama Devi Sahu

59 days ago

✨प्रभु जगन्नाथ के ज्वर में माँ लक्ष्मी की सेवा🙏🏻 ⚜️स्नान पूर्णिमा का पावन दिन था, एक सौ आठ कलशों का जल बरसा था। दिव्य स्नान के बाद प्रभु जगन्नाथ को ज्वर आया, नीलाचल का हर भक्त व्याकुल हो गया।🙏🏻 ✨मंदिर की घंटियाँ भी जैसे धीमे स्वर में बोलीं, दीपों की लौ भी मौन होकर डोली। सेवक हाथ जोड़कर प्रभु के द्वार पर खड़े रहे, सबकी आँखों में प्रेम और चिंता के आँसू भरे रहे।🙏🏻 ✨तभी माँ लक्ष्मी करुणा बनकर आईं, ममता की मधुर छाया अपने संग लाई। उन्होंने प्रेम से प्रभु का मस्तक सहलाया, शीतल चंदन का लेप बड़े स्नेह से लगाया।🙏🏻 ✨तुलसी और औषधि का काढ़ा बनाया, अपने हाथों से प्रभु को धीरे-धीरे पिलाया। हर पल उनका ध्यान रखा, एक क्षण भी सेवा से मन न हटाया। ✨माँ की आँखों में आँसू थे, पर चेहरे पर विश्वास की ज्योति थी। वह जानती थीं—यह भी प्रभु की लीला है, फिर भी पत्नी का प्रेम सबसे निराला था।🙏🏻 ✨रात भर दीपक जलता रहा, भक्ति का संगीत बहता रहा। माँ लक्ष्मी प्रभु के चरणों के पास बैठीं, हर साँस में उनका नाम कहती रहीं। ✨बाहर भक्त दर्शन को तरसते रहे, भीतर माँ सेवा में रत रहती रहीं। प्रेम का यह दृश्य स्वर्ग से भी सुंदर था, जहाँ समर्पण ही सबसे बड़ा आभूषण था।🙏🏻 ✨धीरे-धीरे ज्वर उतरने लगा, प्रभु का मुख फिर से मुस्कुराने लगा। मंदिर में आनंद की लहर छा गई, हर दिशा में जय-जयकार गूँज गई। ✨भक्त बोले—धन्य हैं माँ लक्ष्मी, जिनकी सेवा प्रेम का अमृत बन गई। धन्य हैं प्रभु जगन्नाथ, जो मानव भावों से संसार को जोड़ते हैं। ✨यह अनसर की पावन कथा हमें सिखाती है, कि सच्चा प्रेम केवल शब्दों में नहीं, सेवा में दिखाई देता है। जब अपने कष्ट में हों, तब साथ निभाना ही सबसे बड़ी भक्ति है। माँ लक्ष्मी की करुणा और प्रभु जगन्नाथ की दिव्य लीला युगों-युगों तक भक्तों के हृदय को प्रेम, विश्वास और समर्पण से आलोकित करती रहेगी।🙏🏻🤔 🙏🏻जय जगन्नाथ! जय माँ लक्ष्मी!🙏🏻

Post media

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!