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Rama Devi Sahu

182 days ago

*卐 ~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~ 卐* *🌞दिनांक - 02 मार्च 2026* *⛅दिन - सोमवार* *⛅विक्रम संवत् - 2082* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - वसंत* *⛅मास - फाल्गुन* *⛅पक्ष - शुक्ल* *⛅तिथि - चतुर्दशी शाम 05:55 तक तत्पश्चात् पूर्णिमा* *⛅नक्षत्र - अश्लेशा प्रातः 07:51 तक तत्पश्चात् मघा* *⛅योग - अतिगण्ड दोपहर 12:19 तक तत्पश्चात् सुकर्मा* *⛅राहुकाल - सुबह 08:16 से सुबह 09:44 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 06:48* *⛅सूर्यास्त - 06:30 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:10 से प्रातः 05:59 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:16 से दोपहर 01:03 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:14 से मध्यरात्रि 01:03 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - हुताशनी पूर्णिमा, होलिका दहन* *🌥️विशेष - चतुर्दशी, पूर्णिमा और व्रत के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* *🔹गार्हस्थ्य ब्रह्मचर्य🔹* *🔸श्री मनु महाराज ने गृहस्थाश्रम में ब्रह्मचर्य की व्याख्या इस प्रकार की हैः* *🔸अपनी धर्मपत्नी के साथ केवल ऋतुकाल में समागम करना, इसे गार्हस्थ्य ब्रह्मचर्य कहते हैं ।* *🔸रजोदर्शन के प्रथम दिन से सोलहवें दिन तक ऋतुकाल माना जाता है । इसमें मासिक धर्म की चार रात्रियाँ तथा ग्यारहवीं व तेरहवीं रात्रि निषिद्ध है । शेष दस रात्रियों से दो सुयोग्य रात्रियों में स्वस्त्री-गमन करने वाला व्यक्ति गृहस्थ ब्रह्मचारी है ।* *🔸इस प्रकार आहार, निद्रा व ब्रह्मचर्य का युक्तिपूर्वक सेवन व्यक्ति को स्वस्थ, सुखी व सम्मानित जीवन की प्राप्ति में सहायक होता है ।* 🌞🚩🚩 *" ll जय श्री राम ll "* 🚩🚩🌞*

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