
प्रशांत कुमार मिश्रा
6 days ago
*"शरतचंद्रप्रभामुष्टमुखाब्जायै नमो नमः।* *कंदर्पकोटिलावण्यलीलाधाम्ने नमो नमः॥"* (ब्रह्मवैवर्त पुराण ) *श्रीकृष्ण कहते है-"जिनके श्रीमुख की दिव्य आभा के सम्मुख शरद पूर्णिमा के करोड़ों चंद्रमाओं का संचित गर्व भी पल भर में खंडित हो जाता है, उन परम पावन, आह्लादकारिणी श्रीराधा के चरणों में मेरा अनंत वंदन है।* *जो केवल सुंदर नहीं, अपितु करोड़ों कामदेवों के सौंदर्य, लावण्य और समस्त श्रृंगारिक लीलाओं की एकमात्र उद्गम स्थली और साक्षात परम धाम हैं, उन वृषभानु-नंदिनी, जगज्जननी श्रीराधा रानी को मैं बारंबार प्रणाम करता हूँ।"* 🙏🌹🌹🌹🌹🌹🙏

Comments (1)

R k jangid phulera Jaipur
Oct 28, 2026
राधे राधे जी 🙏
