
Rama Devi Sahu
68 days ago
गंगा में मिलने के बाद यमुना भी गंगा हो जाती है... भारत की दो प्रमुख और पवित्र नदियाँ—गंगा और यमुना—अलग-अलग स्थानों से निकलती हैं। दोनों नदियाँ सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा करने के बाद उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आपस में मिलती हैं। इस पवित्र स्थान को त्रिवेणी संगम कहा जाता है। प्रयागराज में गंगा और यमुना के मिलने के बाद आगे बहने वाली संयुक्त नदी को केवल गंगा कहा जाता है। इसका मतलब यह नहीं है कि यमुना का पानी समाप्त हो जाता है। यमुना का पानी गंगा में मिलकर उसी बड़ी धारा का हिस्सा बन जाता है। गंगा नदी कहाँ से निकलती है? गंगा की प्रमुख धारा भागीरथी उत्तराखंड के गोमुख स्थित गंगोत्री हिमनद से निकलती है। भागीरथी और अलकनंदा नदियाँ देवप्रयाग में मिलती हैं। इस संगम के बाद संयुक्त नदी को गंगा कहा जाता है। गंगा आगे ऋषिकेश और हरिद्वार से गुजरते हुए मैदानी क्षेत्रों में प्रवेश करती है। इसके बाद यह कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी और पटना सहित अनेक शहरों से होकर बहती है। यमुना नदी कहाँ से निकलती है? यमुना नदी उत्तराखंड के यमुनोत्री हिमनद से निकलती है। यह नदी देहरादून क्षेत्र के पास से बहते हुए दिल्ली, मथुरा और आगरा जैसे प्रमुख शहरों से गुजरती है। लंबी यात्रा के बाद यमुना प्रयागराज पहुँचती है और वहाँ गंगा में मिल जाती है। इसी स्थान पर यमुना की स्वतंत्र नदी के रूप में यात्रा समाप्त मानी जाती है। त्रिवेणी संगम क्यों कहा जाता है? प्रयागराज में गंगा और यमुना का वास्तविक संगम होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहाँ तीसरी नदी सरस्वती भी अदृश्य रूप से आकर मिलती है। इसलिए इसे त्रिवेणी संगम कहा जाता है। संगम पर कभी-कभी गंगा और यमुना के पानी का रंग अलग दिखाई देता है। यमुना का पानी कुछ गहरा या नीला-हरा और गंगा का पानी हल्का या मटमैला दिखाई दे सकता है। लेकिन कुछ दूरी आगे बहने के बाद दोनों नदियों का पानी पूरी तरह मिल जाता है। यमुना भी गंगा क्यों कहलाती है? जब दो नदियाँ आपस में मिलती हैं, तो आगे बहने वाली धारा को सामान्यतः मुख्य नदी का नाम दिया जाता है। गंगा भारत की विशाल और प्रमुख नदी-व्यवस्था की मुख्य नदी मानी जाती है, जबकि यमुना उसकी सबसे बड़ी सहायक नदियों में से एक है। इसके अलावा गंगा का नाम हजारों वर्षों से धार्मिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है। इसलिए प्रयागराज के बाद संयुक्त धारा को गंगा कहा जाता है। सरल उदाहरण से समझें—यदि दो गिलास पानी एक बड़े बर्तन में डाल दिए जाएँ, तो दोनों का पानी आपस में मिल जाता है। किसी एक गिलास का पानी गायब नहीं होता, बल्कि दोनों मिलकर एक ही मिश्रित जल बन जाते हैं। ठीक इसी प्रकार यमुना का जल गंगा में मिलकर गंगा की धारा का हिस्सा बन जाता है। प्रयागराज के बाद क्या होता है? प्रयागराज के बाद गंगा आगे वाराणसी, पटना और पश्चिम बंगाल की ओर बहती है। आगे चलकर यह विशाल डेल्टा बनाती हुई बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है। यमुना का पानी भी इसी संयुक्त धारा के साथ आगे बढ़ता है, लेकिन नदी का नाम गंगा ही रहता है। निष्कर्ष यमुना नदी प्रयागराज में गंगा से मिलने के बाद समाप्त या गायब नहीं होती। उसका जल गंगा के जल में मिलकर एक बड़ी संयुक्त धारा बना देता है। ऐतिहासिक, धार्मिक और भौगोलिक परंपरा के कारण इस संयुक्त नदी को आगे गंगा कहा जाता है। इसीलिए कहा जाता है—“गंगा में मिलने के बाद यमुना भी गंगा हो जाती है।”

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