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Rohit Patel

183 days ago

🪔"ॐ वज्रनखाय विद्महे तीक्ष्ण दंष्ट्राय धीमहि तन्नो नरसिह प्रचोदयात"🪷📿🙏💞💞💞💞

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Comments (10)

Rohit  Patel

Rohit Patel

Feb 28, 2026

जी krishuu जी 💞💞💞💞💞

Rohit  Patel

Rohit Patel

Feb 28, 2026

जी रमा जी.. ॐ नमो नारायणाय जी 🪷📿🙏💞💞💞💞 शुभ रात्रि वंदन जी 🌹🍨🙏💞💞💞💞

Rohit  Patel

Rohit Patel

Feb 28, 2026

जी सुमन जी...🙂🙏💞💞💞

Radhe Radhe

Radhe Radhe

Feb 28, 2026

‼️ शुभ शनिवार नरसिंह द्वादशी की हार्दिक शुभकामनाएं, के साथ शुभ रात्रि वंदन जी ।।‼️

Radhe Radhe

Radhe Radhe

Feb 28, 2026

‼️ महीने के अंतिम शनिवार शुभ रात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं वंदन जी ‌‌।।‼️

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Feb 28, 2026

🙏🌹 Shubha Shanivar or Nrushingh Dwadashi ki Hardik Shubhkamnaye ke Sath Subha Ratri Jii 🙏🌹

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Feb 28, 2026

🙏‼️ Om Nrushinghay Vidmahe, Vajranakhay Dhimahi । Tanno Nrushinghh Prachodayat ll ‼️🙏

Rohit  Patel

Rohit Patel

Feb 28, 2026

जी पुनम जी...।। ॐ महा लक्ष्मी नमो नमः ।। ।। श्रीसूक्त साम्पुटिक पाठ का धार्मिक महत्व ।। यह पाठ केवल धन नहीं, सुरक्षा और सौभाग्य भी देता है। दरिद्रता हटानी है तो यह पाठ आज से शुरू करें। शुक्रवार को किया गया यह पाठ चमत्कारी फल देता है। प्रदोष काल में किया गया श्रीसूक्त साधना विशेष फलदायक है। साम्पुटिक श्रीसूक्त पाठ में वैदिक श्रीसूक्त के प्रत्येक मंत्र के साथ बीज मंत्र तथा देवी स्तुति का संयोजन किया जाता है। इससे मंत्रों की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। यह पाठ मुख्य रूप से धन, ऐश्वर्य, कीर्ति, सौभाग्य, मानसिक शांति तथा दरिद्रता निवारण के लिए किया जाता है। यह स्तुति वैदिक परंपरा में विशेष स्थान रखती है और देवी के श्रीस्वरूप की उपासना का सर्वोच्च माध्यम मानी जाती है। ।। मुख्य देवियाँ ।। 1=लक्ष्मी – धन, समृद्धि और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री 2=दुर्गा – भय, बाधा और नकारात्मकता का नाश करने वाली साम्पुटिक रूप में जब श्रीसूक्त के साथ “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं…” तथा “ॐ दुर्गे स्मृता…” जैसे मंत्र जोड़े जाते हैं, तो यह केवल धन प्राप्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सुरक्षा, शत्रु बाधा शांति और ग्रहजन्य कष्टों को भी शांत करता है। ।। धार्मिक और आध्यात्मिक लाभ ।। दरिद्रता और आर्थिक संकट का निवारण घर में स्थायी लक्ष्मी का वास मानसिक तनाव और भय से मुक्ति व्यापार में वृद्धि और प्रतिष्ठा कुंडली में शुक्र या चंद्र दोष की शांति परिवार में सौहार्द और सकारात्मक ऊर्जा ।। कितनी बार पाठ करें ।। सामान्य साधना के लिए – प्रतिदिन 1 पाठ विशेष इच्छा पूर्ति हेतु – 11 पाठ प्रतिदिन गंभीर आर्थिक संकट में – 21 या 51 पाठ अनुष्ठान रूप में – 108 पाठ (विशेष तिथि पर) यदि पूर्ण अनुष्ठान कर रहे हों तो 11 दिन या 21 दिन निरंतर पाठ अत्यंत प्रभावी माना जाता है। ।। पाठ कब करें ।। शुक्रवार प्रातःकाल या संध्या समय पूर्णिमा, दीपावली, अक्षय तृतीया प्रदोष काल में (विशेष फलदायक) पुष्य नक्षत्र में नवरात्रि के दिनों में सुबह ब्रह्ममुहूर्त या संध्या दीपक के सामने बैठकर पाठ करना श्रेष्ठ माना गया है। ।। पाठ की विधि ।। स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें घी का दीपक जलाएं कमल या गुलाबी पुष्प अर्पित करें श्री यंत्र या महालक्ष्मी चित्र के सामने पाठ करें अंत में आरती और क्षमा प्रार्थना करें यदि संभव हो तो कमलगट्टे या स्फटिक की माला से जप करें। ।। विशेष सावधानियाँ ।। पाठ शुद्ध उच्चारण से करें क्रोध, अशुद्धि या नकारात्मक मनोदशा में न करें निरंतरता बनाए रखें लालच या किसी को हानि पहुँचाने की भावना से न करें। ।। निष्कर्ष ।। साम्पुटिक श्रीसूक्त केवल धन प्राप्ति का साधन नहीं, बल्कि यह संपूर्ण जीवन में समृद्धि, सुरक्षा और दिव्य कृपा का माध्यम है। नियमित और श्रद्धापूर्वक किया गया पाठ व्यक्ति के भाग्य को परिवर्तित करने की क्षमता रखता है। अंत में संकल्प लेकर पाठ करें और समर्पण भाव से “श्री महालक्ष्म्यार्पणम् अस्तु” कहकर पूर्ण करें। || साम्पुटिक श्रीसूक्त पाठ || ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः | ॐ दुर्गे स्मृता हरसिभीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि | ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्ण रजतस्रजाम् | चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह || दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता | ॐ दुर्गे स्मृता हरसिभीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभं ददासि | ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः | ॐ तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् | यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम् || दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता | ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः | ॐ दुर्गे स्मृता हरसीभीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि | ॐ अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनाद प्रबोधिनीम् | श्रियं देवी मुपह्वये श्रीर्मा देवी जुषताम् || दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता | ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः | ॐ दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि | ॐ कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम् | पद्मेस्थितां पद्मवर्णां तामिहो पह्वये श्रियम् || दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता | ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः | ॐ दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि | ॐ चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियम लोके देवजुष्टामुदाराम् | तां पद्मिनीमीं शरणमहं प्रपद्ये अलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे || दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता | ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः | ॐ दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि | ॐ आदित्यवर्णे तपसोधिजातो वनस्पतिस्तव वृक्षोथबिल्वः | तस्यफलानि तपसानुदन्तु मायान्त रायाश्च बाह्या अलक्ष्मीः || दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता | ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः | ॐ दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि | ॐ उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह | प्रादुर्भूतो सुराष्ट्रेस्मिन कीर्तिमृद्धिं ददातु में || दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता | ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः | ॐ दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि | ॐ क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम् | अभूतिमसमृद्धिं च सर्वां निर्णुद में गृहात् || दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता | ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः | ॐ दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि | ॐ गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करिषिणिम् | ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम् || दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता | ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः | ॐ दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि | ॐ मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि | पशूनां रूप मन्नस्य मयी श्रीः श्रयतां यशः || दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता | ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः | ॐ दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि | ॐ कर्दमेन प्रजा भूता मयी संभव कर्दम | श्रियं वासय में कुले मातरं पद्ममालिनीम् || दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता | ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः | ॐ दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि | ॐ आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस् में गृहे | नि च देविं मातरं श्रियं वासय में कुले || दरिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्दचित्ता | ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः | ॐ दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि | ॐ आर्द्रां यः करिणिं यष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम् | सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह || दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता | ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः | ॐ दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि | ॐ

poonam sharma poonam

poonam sharma poonam

Feb 28, 2026

Jai ho Narsingh Bhagwan ji Ki🙏🏻🙏🏻🌹🌹