
Rama Devi Sahu
295 days ago
💙 “प्रेम की नीलिमा – ” 🌿 एक दिन श्रीकृष्ण ने राधा से पूछा — “राधे, तुम मुझसे इतना प्रेम क्यों करती हो? मैं तो कभी स्थिर नहीं रहता — कभी वृंदावन, कभी मथुरा, कभी द्वारका...” राधा मुस्कुराई — “श्याम, प्रेम तो वहाँ होता है जहाँ कोई ठहराव नहीं, क्योंकि ठहराव तो शरीर का होता है, और मेरा प्रेम तो आत्मा से है, जो सदा तुम्हारे संग रहती है।” कृष्ण कुछ क्षण मौन रहे, फिर बोले — “पर राधे, जब मैं दूर चला जाऊँ, तब तुम्हारा क्या होगा?” राधा ने आकाश की ओर देखते हुए कहा — “जब सूर्य अस्त होता है तो क्या उसकी रोशनी खत्म हो जाती है? नहीं श्याम… वो चाँद बनकर चमकता है। तुम भी जब दूर जाओगे, तो मेरे प्राणों में ‘नाम’ बनकर बसोगे — ‘राधे-श्याम’ होकर।” कृष्ण मुस्कुरा उठे… उन्होंने राधा के मस्तक पर चरणस्पर्श किया और बोले — “राधे, तुम्हारा प्रेम ही तो मेरे अस्तित्व की पहचान है। तुम न होतीं तो मैं ‘कृष्ण’ कहाँ होता!” और उस क्षण से, जहाँ भी “कृष्ण” का नाम लिया गया, वहाँ “राधा” अपने आप जुड़ गईं। क्योंकि प्रेम और ईश्वर — कभी अलग नहीं हो सकते। --- ✨ भावार्थ: राधा का प्रेम त्याग नहीं, अंतर्मन की स्थिरता है। वो सिखाती हैं कि प्रेम में दूरी नहीं होती — जो एक बार हृदय में बस जाए, वो हर जन्म में “नाम” बनकर साथ चलता है। 🌸 राधे राधे भक्तों.. ये लीला केवल कथा नहीं, एक अनंत अनुभव है — जहाँ प्रेम ही परब्रह्म बन जाता है। 🌸

Comments (2)

Rama Devi Sahu
Nov 8, 2025
Radhey Radhey ❤️🙏🙏

Rakesh Kumar
Nov 8, 2025
very nice 👍👍👍👍
