MyMandirInstall
Profile

Rama Devi Sahu

46 days ago

हिंदू धर्म में वर्ष में चार नवरात्रि आते हैं। लेकिन आषाढ़ और माघ की गुप्त नवरात्रि का अलग महत्व माना जाता है। गुप्त नवरात्रि का समय साधना, आध्यात्मिक उन्नति और आराधना का प्रतीक माना जाता है। गुप्त नवरात्रि में सामान्य नवरात्रि की तरह दुर्गा पूजन का आयोजन नहीं किया जाता है। इस समय मां दुर्गा के भक्त मां आदिशक्ति की गुप्त रूप से उपासना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय की गई पूजा-अर्चना का अधिक फल प्राप्त होता है। आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हर साल आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा तिथि से होती है। इस साल गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई 2026, बुधवार से प्रारंभ हो रहे हैं। #आषाढ़_गुप्त_नवरात्रि_कब_से_कब_तक_रहेगी: इस बार आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई 2026, बुधवार से शुरू होकर 23 जुलाई 2026 तक मनाई जाएगी। ##दस_महाविद्याओं_की_होती_है_आराधना: गुप्त नवरात्रि में मां पार्वती के दस स्वरूपों यानी दस महाविद्याओं की पूजा का महत्व बताया गया है. इनमें मां काली, मां तारा, मां त्रिपुर सुंदरी, मां षोडशी, मां भुवनेश्वरी, मां छिन्नमस्ता, मां त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी और मां कमला शामिल हैं. मान्यता है कि ये सभी शक्तियां मां पार्वती के विभिन #आषाढ़_गुप्त_नवरात्रि_घटस्थापना_मुहूर्त_2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 14 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजकर 42 मिनट पर शुरू होगी और प्रतिपदा तिथि का समापन 15 जुलाई 2026 को सुबह 08 बजकर 20 मिनट पर होगा। घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 03 मिनट से सुबह 08 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। कलश स्थापना के मुहूर्त की कुल अवधि 2 घंटे 17 मिनट है। #गुप्त_नवरात्रि_में_कैसे_करें_घट_स्थापना: गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। घटस्थापना के लिए स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। अब पूजा स्थल की साफ-सफाई करें और गंगाजल से छिड़काव करें। इसके बाद एक चौकी पर लाल या पीले रंग का साफ वस्त्र बिछाएं और मां दुर्गा के दस महाविद्याओं की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। #गुप्त_नवरात्रि_और_सामान्य_नवरात्रि_में_अंतर: सामान्य नवरात्रि में सात्विक और तांत्रिक दोनों प्रकार की पूजा की जाती है. वहीं गुप्त नवरात्रि में तांत्रिक साधना का महत्व अधिक माना जाता है. इस दौरान अधिक प्रचार-प्रसार नहीं किया जाता और साधना को गोपनीय रखा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि गोपनीय रूप से की गई उपासना अधिक सफल होती है। #गुप्त_नवरात्रि_की_पूजन_विधि: गुप्त नवरात्र में विशेष साधना के लिए लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. मां के सामने घी का एकमुखी दीपक जलाएं. सुबह और शाम "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडाय विच्चे" मंत्र का 108 बार जाप करें और अपनी मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करें. अगर कलश स्थापना की है तो सुबह और शाम मंत्र जाप, दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें. दोनों समय आरती करें और मां को लौंग व बताशे का भोग लगाएं. लाल फूल अर्पित करना शुभ माना गया है. इस दौरान देवी को आक, मदार, दूब और तुलसी नहीं चढ़ानी चाहिए. पूरे नवरात्र में सात्विक भोजन और संयमित दिनचर्या अपनाने की सलाह दी जाती है। #क्या_है_गुप्त_नवरात्रि_का_महत्व? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चैत्र और शारदीय नवरात्र की तरह गुप्त नवरात्रि भी ऋतु परिवर्तन के समय आती है. महाकाल संहिता और कई शाक्त ग्रंथों में इसका उल्लेख मिलता है. मान्यता है कि इस दौरान की गई साधना विशेष इच्छाओं की पूर्ति और आध्यात्मिक सिद्धि के लिए फलदायी होती है. गुप्त नवरात्रि में पूजा और मनोकामना को जितना गोपनीय रखा जाए, उतना अधिक शुभ माना जाता है।

Post media

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!