
Srikumar महाराज🇮🇳☸️
252 days ago
कबीरा कुँआ एक है, पानी भरे अनेक, बर्तन में ही भेद है, पानी सब में एक, गहने सब आकार के, पर सोना सब में एक, नाम भले सौ रख लो, पर मालिक सबका एक, नदियाँ चाहे सौ बहें, पर सागर सबका एक, काया सबकी भिन्न है, पर साँसें सब में एक, माटी एक, कुम्हार एक, बस रूप धरे हैं अनेक, मूरत हो या मटका, सब में मिट्टी है एक,,
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