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Rama Devi Sahu

74 days ago

🌟 संसार का सबसे बड़ा तीर्थ और सबसे बड़े देवता 🌟 सनातन संस्कृति में माता-पिता का स्थान ईश्वर से भी ऊपर माना गया है। पद्म पुराण का यह अद्भुत श्लोक हमें याद दिलाता है कि असली पुण्य कहाँ छिपा है: 🚩 ॥ मूल श्लोक ॥ 🚩 “सर्वतीर्थमयी माता सर्वदेवमयः पिता। मातरं पितरं तस्मात् सर्वयत्नेन पूजयेत्॥” 🌿 सरल शब्दों में इसका अर्थ: • सर्वतीर्थमयी माता: माता सभी तीर्थों का स्वरूप है (अर्थात माता के चरणों में ही संसार के सारे पवित्र तीर्थ समाहित हैं)। • सर्वदेवमयः पिता: पिता सभी देवताओं के स्वरूप हैं (अर्थात पिता में ही सभी देवी-देवताओं का वास है)। • मातरं पितरं तस्मात् सर्वयत्नेन पूजयेत्: इसलिए, प्रत्येक मनुष्य का यह परम कर्तव्य है कि वह हर संभव प्रयास करके अपने माता-पिता का आदर-सत्कार करे और उनकी सेवा-पूजा करे। जिस घर में माता-पिता का सम्मान, सेवा और आदर होता है, वहाँ प्रेम, सुख और संस्कारों का दिव्य प्रकाश सदैव बना रहता है। ✨ केवल शब्दों से नहीं, बल्कि अपने कर्मों से अपने माता-पिता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें। क्योंकि उनके चरणों में ही जीवन के सबसे बड़े आशीर्वाद छिपे होते हैं। 🌺 🙏 माता-पिता की सेवा ही सच्ची भक्ति है। 🙏

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Comments (3)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Jun 17, 2026

सदा ईमानदारी का मार्ग अपनाएं। ईमानदारी से की गई मेहनत का फल मीठा होता है। बाबा का मार्ग ईमानदारी का मार्ग है, इस पर अडिग रहें। अपने काम में पूरी ईमानदारी रखें। प्रभु के नाम के साथ हर काम को अंजाम दें। 🙏🌹जय श्री राम🌹 🌺जय श्री बाला जी महाराज की🌺 🌸जय श्री कृष्ण🌸 🔱हर हर महादेव🔱

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Jun 17, 2026

ye bhi Sach hai...fir bhi Post dekh kar kuch tho Sikhenge....!! hai na..?

Srikumar  महाराज🇮🇳☸️

Srikumar महाराज🇮🇳☸️

Jun 17, 2026

sirf internet par asa post daalte sab harkikat Mei Koi nahi karte 🙏 ram ram