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Rama Devi Sahu

98 days ago

अधिकमास में भूलकर भी न छोड़ें भगवान विष्णु के ये ३३ दिव्य नाम, बदल सकती है किस्मत। ।। #जय_श्री_हरि ।। २. पुरुषोत्तम मास में इन ३३ नामों का जप दिला सकता है धन, सुख और विष्णु कृपा। ३. अधिकमास का सबसे शक्तिशाली पाठ, जो खोल सकता है सौभाग्य के द्वार। ४. भगवान विष्णु के ३३ नामों में छिपा है समृद्धि और मोक्ष का रहस्य। ५. अधिकमास में रोज करें इन नामों का जप, घर में आएगी सुख-शांति और लक्ष्मी कृपा। ६. शास्त्रों में बताया गया अधिकमास का सबसे चमत्कारी विष्णु पाठ। ७. जो भक्त अधिकमास में करता है ये जप, उसके जीवन से दूर होती हैं बाधाएं। ८. पुरुषोत्तम मास में इन ३३ नामों का जाप कई जन्मों के पापों को करता है नष्ट। ।। अधिकमास में भगवान विष्णु के ३३ दिव्य नामों का महत्व ।। सनातन धर्म में अधिकमास को अत्यंत पुण्यदायी और भगवान विष्णु को समर्पित मास माना गया है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस मास में किए गए जप, तप, दान, पूजा और पाठ का फल कई गुना बढ़ जाता है। विशेष रूप से भगवान विष्णु के ३३ पवित्र नामों का जप करने से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। इन ३३ नामों में भगवान विष्णु के विभिन्न स्वरूपों, शक्तियों और दिव्य गुणों का वर्णन है। प्रत्येक नाम अपने भीतर विशेष ऊर्जा और कृपा समेटे हुए है। अधिकमास में इन नामों का श्रद्धा और भक्ति से जप करने पर भगवान विष्णु शीघ्र प्रसन्न होते हैं तथा साधक के जीवन की बाधाएँ दूर होने लगती हैं। ।। ये हैं भगवान विष्णु के दिव्य ३३ नाम ।। विष्णुं जिष्णुं महाविष्णुं हरिं कृष्णमधोक्षजम् । केशवं माधवं राममच्युतं पुरुषोत्तमम् ॥ गोविन्दं वामनं श्रीशं श्रीकण्ठं विश्वसाक्षिणम् । नारायणं मधुरिपुमनिरुद्धं त्रिविक्रमम् ॥ वासुदेवं जगद्योनिमनन्तं शेषशायिनम् । सङ्कर्षणं च प्रद्युम्नं दैत्यारिं विश्वतोमुखम् ॥ जनार्दनं धरावासं दामोदरमघमर्दनम् । श्रीपतिं च त्रयस्त्रिंशदुद्दिश्यप्रतिनामभिः ॥ इन नामों का आध्यात्मिक महत्व= १. “विष्णु” — जो सम्पूर्ण सृष्टि में व्याप्त हैं। २. “महाविष्णु” — समस्त ब्रह्मांड के पालनकर्ता। ३. “हरि” — पापों और दुखों का हरण करने वाले। ४. “कृष्ण” — आकर्षण और प्रेम के स्वरूप। ५. “पुरुषोत्तम” — समस्त पुरुषों में श्रेष्ठ। ६. “गोविन्द” — इन्द्रियों और पृथ्वी के रक्षक। ७. “नारायण” — समस्त जीवों का आधार। ८. “दामोदर” — भक्तिभाव से बंध जाने वाले भगवान। इसी प्रकार प्रत्येक नाम साधक के भीतर सकारात्मक ऊर्जा, धर्म, संयम और भक्ति का संचार करता है। ।। अधिकमास में कैसे करें जप ।। • प्रातः स्नान करके पीले या स्वच्छ वस्त्र धारण करें। • भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण या लक्ष्मीनारायण का पूजन करें। • तुलसी दल, पीले पुष्प और पंचामृत अर्पित करें। • घी का दीपक जलाकर इन ३३ नामों का कम से कम ११, २१ या १०८ बार जप करें। • संभव हो तो “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का भी जाप करें। • एक समय सात्विक भोजन और ब्रह्मचर्य का पालन अत्यंत शुभ माना गया है। अधिकमास में इन नामों के जप से मिलने वाले फल= • आर्थिक संकट और दरिद्रता में कमी आती है। • घर में सुख-शांति और सकारात्मकता बढ़ती है। • संतान सुख और वंश वृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। • मानसिक तनाव और भय दूर होते हैं। • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। • मोक्ष मार्ग की प्राप्ति का पुण्य मिलता है। शास्त्रों के अनुसार जो भक्त अधिकमास में श्रद्धा से इन ३३ नामों का जप, पाठ और दान करता है, उसे विपुल लक्ष्मी, सुख, समृद्धि और पुण्य की प्राप्ति होती है। यह मास आत्मशुद्धि, भक्ति और ईश्वर से जुड़ने का श्रेष्ठ अवसर माना गया है। विष्णु भक्ति का संदेश= अधिकमास केवल धार्मिक अनुष्ठानों का समय नहीं, बल्कि अपने जीवन को धर्म, संयम और भक्ति से जोड़ने का दिव्य अवसर है। भगवान विष्णु के ये ३३ नाम साधक के भीतर श्रद्धा, विश्वास और आध्यात्मिक शक्ति जागृत करते हैं। इसलिए इस पवित्र मास में अधिक से अधिक भगवान के नामों का स्मरण करें और अपने जीवन को मंगलमय बनाएं। 🙏🕉️🚩

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