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Rama Devi Sahu

62 days ago

लीला का प्रसंग: ऋषि व्याघ्रपाद के पुत्र उपमन्यु छोटे बालक थे। एक बार उन्होंने अपनी माता से दूध माँगा, पर गरीबी के कारण माता के पास दूध नहीं था। माता ने आटा घोलकर पिला दिया, पर बालक समझ गया कि यह दूध नहीं है। माता ने दुखी होकर कहा— "बेटा! अगर दूध चाहिए तो जगत के पिता महादेव की शरण में जा, वही सब देने वाले हैं।" छोटा सा बालक हिमालय पर जाकर घोर तपस्या करने लगा। भगवान शिव ने उनकी परीक्षा लेने के लिए 'इंद्र' का रूप धरा और प्रकट होकर शिव जी की निंदा करने लगे। उन्होंने कहा— "उस भस्मधारी (शिव) की पूजा छोड़ दे, मैं तुझे स्वर्ग का ऐश्वर्य दूँगा।" तर्कपूर्ण मोड़: नन्हे उपमन्यु ने अपना कान बंद कर लिया और क्रोध में कहा— "मेरे शिव जैसे भी हों, मेरे पिता हैं। तुम्हारी निंदा सुनने से अच्छा है कि मैं यहीं प्राण त्याग दूँ।" जैसे ही बालक ने आत्मदाह की तैयारी की, साक्षात महादेव अपने दिव्य स्वरूप में प्रकट हो गए। उन्होंने बालक को अपनी गोद में उठाया और कहा— "बेटा! तूने एक कटोरा दूध माँगा था, मैं तुझे 'क्षीर सागर' (दूध का समुद्र) ही उपहार में देता हूँ।"

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