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राजा पर्व के पीछे की कहानी ओडिशा में 'राजा' 3-4 दिन का त्योहार है, जो मासिक धर्म और मातृभूमि के सम्मान से जुड़ा है। इस दौरान खेती का काम रोक दिया जाता है ताकि ज़मीन को आराम मिल सके। पहला दिन स्नान का होता है, जबकि अगले दो दिनों तक स्नान नहीं किया जाता। नई साड़ी और पैरों में पायल पहनी जाती है, और झूला झूलने का आनंद लिया जाता है। चौथा दिन 'बसुमती स्नान' का होता है – यानी धरती की शुद्धि। माना जाता है कि इन तीन दिनों में धरती माता मासिक धर्म से गुज़रती हैं। लड़कियां 'राजा' पर्व को शक्ति और सृजन का उत्सव मनाने के लिए मनाती हैं। वे नंगे पैर नहीं चलतीं और उन्हें खाना पकाने की भी ज़रूरत नहीं होती। तरह-तरह के पकवान बनते हैं और आम नियमों में ढील दी जाती है। 'राजा' पर्व मासिक धर्म से जुड़ी बुरी प्रथाओं को एक खुशी भरे त्योहार में बदल देता है।

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