
Rama Devi Sahu
36 days ago
**🦚 वर्षा ऋतु में मयूरों के साथ श्रीकृष्ण का दिव्य नृत्य 🦚** सावन का पावन महीना था। वृंदावन के आकाश में घने काले बादल छा गए थे और रिमझिम वर्षा से पूरी धरती हरियाली की चादर ओढ़ चुकी थी। यमुना तट पर ठंडी हवा बह रही थी, कमल के फूल खिल उठे थे और चारों ओर प्रकृति आनंद से झूम रही थी। जैसे ही वर्षा की फुहारें तेज हुईं, वन के सुंदर मोरों ने अपने रंग-बिरंगे पंख फैला दिए और उल्लास से नृत्य करने लगे। यह मनोहारी दृश्य देखकर नटखट कान्हा भी आनंद से भर उठे। उन्होंने अपने मस्तक पर सुशोभित मोरपंख को सँवारा, हाथ में अपनी प्रिय मुरली थामी और मोरों की मधुर लय पर थिरकने लगे। श्रीकृष्ण का नृत्य इतना सुंदर, सहज और मनमोहक था कि स्वयं मोर भी मानो उन्हें अपना साथी समझ बैठे। वे कान्हा के चारों ओर घेरा बनाकर आनंदपूर्वक नाचने लगे। ग्वालबाल तालियाँ बजाकर हँसते और कान्हा का उत्साह बढ़ाते रहे। मुरली की मधुर धुन, वर्षा की रिमझिम और मोरों का नृत्य मिलकर पूरे वृंदावन को दिव्य आनंद से भर रहे थे। यमुना का शांत जल वर्षा की बूँदों से लहरें बना रहा था। चारों ओर हरे-भरे वृक्ष, रंग-बिरंगे पुष्प, तितलियाँ, तोते और मंद सुगंधित पवन उस दृश्य को और भी अलौकिक बना रहे थे। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं प्रकृति भी श्रीकृष्ण के साथ आनंदमग्न होकर नृत्य कर रही हो। यह मधुर लीला हमें बताती है कि भगवान श्रीकृष्ण केवल मनुष्यों के ही नहीं, बल्कि समस्त प्रकृति और प्रत्येक जीव के भी प्रिय हैं। उनके प्रेम, संगीत और आनंद से पूरा सृष्टि लोक पुलकित हो उठता है।

Comments (2)

Rama Devi Sahu
Jul 25, 2026
🙏‼️ Jai Shree Krishna ‼️🙏 Subha Ratri Vishram Ji 🌹🌹

प्रेम कुमार
Jul 25, 2026
🌹🌹 जय श्री कृष्णा 🌹🌹 शुभ दोपहर वंदन बहना 🌹🌹
