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Rama Devi Sahu

139 days ago

वरुथिनी एकादशी (वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी) की पौराणिक व्रत कथा भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं धर्मराज युधिष्ठिर को सुनाई थी। प्राचीन काल में नर्मदा नदी के तट पर मान्धाता नाम के एक अत्यंत दानशील और तपस्वी राजा राज करते थे। वे एक धार्मिक शासक थे और अपनी प्रजा का पुत्रवत पालन करते थे। एक बार राजा मान्धाता घोर जंगल में जाकर अपनी तपस्या में लीन हो गए। वे मौन रहकर भगवान विष्णु का ध्यान कर रहे थे। उसी समय वहां एक जंगली भालू आया और उसने राजा के पैर को चबाना शुरू कर दिया। राजा अपनी तपस्या में इतने लीन थे कि उन्होंने न तो क्रोध किया और न ही अपनी जगह से हिले। भालू उन्हें घसीटता हुआ और गहरे जंगल में ले गया। पीड़ा बढ़ने पर राजा मान्धाता ने व्याकुल होकर मन ही मन भगवान विष्णु से रक्षा की गुहार लगाई। अपने भक्त की पुकार सुनकर भगवान श्रीहरि प्रकट हुए और उन्होंने अपने सुदर्शन चक्र से उस भालू का वध कर दिया। यद्यपि भालू मर चुका था, लेकिन वह राजा का पैर चबा चुका था, जिससे राजा अत्यंत दुखी और कुरूप हो गए थे। उन्हें इस अवस्था में देखकर भगवान विष्णु बोले: "हे राजन! दुखी मत हो। यह तुम्हारे पूर्व जन्म के अपराध का फल है। तुम मथुरा जाओ और वहां वरुथिनी एकादशी का व्रत रखकर मेरे वराह अवतार की पूजा करो। इस व्रत के प्रभाव से तुम्हारे अंग फिर से सुंदर और पूर्ण हो जाएंगे।" भगवान की आज्ञा पाकर राजा मान्धाता ने मथुरा जाकर श्रद्धापूर्वक वरुथिनी एकादशी का व्रत किया। इस व्रत के पुण्य प्रताप से वे पुन: स्वस्थ और सुंदर अंगों वाले हो गए। मृत्यु के पश्चात उन्हें स्वर्ग लोक की प्राप्ति हुई। शास्त्रों के अनुसार, वरुथिनी एकादशी का व्रत रखने से निम्नलिखित फल प्राप्त होते हैं: पापों का नाश: यह व्रत सौभाग्य देने वाला और समस्त पापों को नष्ट करने वाला है। दस हजार वर्ष की तपस्या: इस व्रत को करने से 10,000 वर्षों तक तपस्या करने के समान फल मिलता है। स्वर्ण दान के समान: सूर्य ग्रहण के समय कुरुक्षेत्र में एक मन स्वर्ण दान करने से जो फल मिलता है, वही फल वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से मिलता है। मोक्ष की प्राप्ति: यह व्रत लोक और परलोक दोनों में सुख प्रदान करता है और अंत में मोक्ष दिलाता है। इस दिन भगवान विष्णु के मधुसूदन या वराह रूप की पूजा की जाती है। व्रत के नियमों में कांसे के बर्तन में भोजन न करना, मांस-मदिरा का त्याग और ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य माना गया है।

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