
Rama Devi Sahu
295 days ago
एक बार गौतम बुद्ध अपने एक प्रिय शिष्य के साथ पैदल यात्रा कर रहे थे। वे एक दूर के गाँव में प्रवचन देने जा रहे थे। रास्ता लंबा और थका देने वाला था, और सूरज की तपिश तेज़ थी। शिष्य लगातार थककर और झुंझलाकर बुद्ध से पूछ रहा था, "गुरुदेव, गाँव कितनी दूर है? मैं बहुत थक गया हूँ।" अपने शिष्य को सांत्वना देने के लिए, बुद्ध हमेशा मुस्कुराते हुए जवाब देते थे, "चिंता मत करो, बेटा। बस दो मील और है।" काफी देर चलने के बाद, शिष्य का धैर्य जवाब दे गया। उसने सड़क के किनारे आराम कर रहे एक व्यक्ति को देखा और आखिर में अपनी निराशा व्यक्त कर दी। “गुरुदेव, अब मैं और नहीं चल सकता! हम जिससे भी पूछते हैं, वह कहता है बस दो मील और है, लेकिन हम चलते ही जा रहे हैं! क्या वे सब झूठ बोल रहे हैं? जब से हमने पिछली बार पूछा था, तब से घंटों बीत चुके हैं!” बुद्ध रुक गए, उन्होंने शिष्य को स्नेह से देखा, और फिर समझाना शुरू किया: "जब मैंने पहली बार उस आदमी से गाँव के बारे में पूछा था, तो मैं इसलिए मुस्कुराया था क्योंकि उस पड़ाव से गाँव सचमुच बस दो मील दूर था। और जब मैंने अगले व्यक्ति से पूछा, तो उस नए पड़ाव से गाँव बस दो मील दूर था। मैंने हर जगह यही बात कही है।" बुद्ध ने अपनी आवाज़ धीमी लेकिन दृढ़ रखते हुए आगे कहा: "अगर मैंने तुम्हें शुरुआत में ही बता दिया होता कि रास्ता दो सौ मील लंबा है और इसमें तीन दिन लगेंगे, तो क्या होता? तुम घबरा जाते, हिम्मत हार जाते, और शायद पहला कदम भी नहीं उठाते। तत्काल, छोटी दूरी पर ध्यान केंद्रित करने से, हम आगे बढ़ते रहने का साहस बनाए रखते हैं।" उन्होंने निष्कर्ष निकाला: "मंज़िल हमेशा उतनी पास नहीं होती जितनी हम उम्मीद करते हैं, लेकिन केवल अगले छोटे कदम पर ध्यान केंद्रित करके, हम आखिरकार पूरी यात्रा पूरी कर लेते हैं। प्रयास का हर पल हमें हमारे लक्ष्य के करीब लाता है।" यह कहानी दृढ़ता और दृष्टिकोण का एक गहरा सबक सिखाती है: * बड़े लक्ष्यों को विभाजित करें: विशाल और डरावने लक्ष्यों को देखकर हम अक्सर रुक जाते हैं। इसके बजाय, इस पर ध्यान केंद्रित करें कि आप अभी क्या पूरा कर सकते हैं—अगला कार्य, अगला घंटा, या अगली छोटी जीत। * गति बनाए रखें: हतोत्साहित होकर रुकने से कहीं बेहतर है धीमी, स्थिर प्रगति करना। आपका हर 'बस दो मील और' का प्रयास आपको लक्ष्य के करीब लाता है। * सकारात्मक दृष्टिकोण: किसी कठिन कार्य के बारे में हम खुद से और दूसरों से जो कहते हैं, वही निर्धारित करता है कि हम उसे पूरा करेंगे या नहीं....

Comments (2)

Rama Devi Sahu
Nov 7, 2025
🌹🌹 Very Good Morning Jii 🌹🌹

Rakesh Kumar
Nov 7, 2025
good morning ji 🙏
