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Rama Devi Sahu

197 days ago

*रिश्ते दिल से निभाना चाहिए* *झूठे शब्दों के आडंबर से नहीं* *और नाराजगी शब्दों मे ही* *होनी चाहिए दिल की* *भावनाओं मे नही* *🙏🌹जय श्री कृष्णा🌹🙏*

Comments (1)

Srikumar  महाराज🇮🇳☸️

Srikumar महाराज🇮🇳☸️

Feb 14, 2026

बहुत ही प्यारा ❤️ दिल को छू लेने वाली पोस्ट इसकी प्रशंसा करना संध्या वन्धन ज्ञान 🙏🌸 `भाग - 19 (विषय: दिखावे की भक्ति)` *आज की जिज्ञासा:* ```"महाराज जी, क्या माला और तिलक लगाना जरूरी है? क्या बिना दिखावे के भक्ति नहीं हो सकती?"``` *महाराज जी का समाधान:* ```"तिलक और माला 'दिखावा' नहीं, बल्कि 'वर्दी' है। जैसे सिपाही वर्दी पहनकर अनुशासित रहता है, वैसे ही तिलक और कंठी तुम्हें गलत काम करने से रोकती हैं। यह तुम्हें याद दिलाती रहती हैं कि तुम किसके हो। हाँ, भीतर का भाव मुख्य है, लेकिन बाहर का नियम उस भाव की रक्षा करता है। लोक-लाज छोड़ो, प्रभु की लाज रखो। दुनिया क्या कहेगी, यह सोचोगे तो भक्ति नहीं कर पाओगे।"``` *आज का दिव्य सूत्र:* > "प्रभु के रंग में ऐसे रंग जाओ कि दुनिया का कोई रंग चढ़े ही नहीं।" 🙏 राधा वल्लभ लाल की जय 🙏🌸 `भाग - 19 (विषय: दिखावे की भक्ति)` *आज की जिज्ञासा:* ```"महाराज जी, क्या माला और तिलक लगाना जरूरी है? क्या बिना दिखावे के भक्ति नहीं हो सकती?"``` *महाराज जी का समाधान:* ```"तिलक और माला 'दिखावा' नहीं, बल्कि 'वर्दी' है। जैसे सिपाही वर्दी पहनकर अनुशासित रहता है, वैसे ही तिलक और कंठी तुम्हें गलत काम करने से रोकती हैं। यह तुम्हें याद दिलाती रहती हैं कि तुम किसके हो। हाँ, भीतर का भाव मुख्य है, लेकिन बाहर का नियम उस भाव की रक्षा करता है। लोक-लाज छोड़ो, प्रभु की लाज रखो। दुनिया क्या कहेगी, यह सोचोगे तो भक्ति नहीं कर पाओगे।"``` *आज का दिव्य सूत्र:* > "प्रभु के रंग में ऐसे रंग जाओ कि दुनिया का कोई रंग चढ़े ही नहीं।" 🙏 राधा वल्लभ लाल की जय 🙏*असली कमाई* एक बूढ़ा व्यक्ति सड़क किनारे मिट्टी के दीये बेच रहा था। एक युवक आया और बिना मोल-भाव किए सारे दीये खरीद लिए। युवक ने कहा, "काका, आज आप जल्दी घर जाकर आराम कीजिए।" बूढ़े की आँखों में आँसू आ गए, उन्होंने कहा, "बेटा, आज बरसों बाद कोई मेरी मेहनत खरीदने नहीं, मेरी थकान बाँटने आया है।" *सीखः* सफलता केवल पैसा कमाने में नहीं किसी के चेहरे पर मुस्कान लाने में भी है।