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Rama Devi Sahu

326 days ago

जय श्री कृष्ण 🙏🌹 ~~~ गोपियों द्वारा उद्धव को सद्ज्ञान ।। भगवान श्री कृष्ण जब वृन्दावन को छोड़कर मथुरा गये तब वे हरदम गोपियों के प्रेम की चर्चा किया करते । उद्धव, जो भगवान के परम सखा और परम भक्त थे, वे प्रगट में तो कुछ भी नहीं कहते थे मगर अपने दिल में बड़े कुढ़ा करते थे और सोचा करते थे कि "न जाने भगवान उन गँवार गोपिकाओं को क्यों इतना याद करते हैं ! हम सभी दिन-रात इनकी सेवा में लगे रहते हैं, मगर हमारी तो कभी भी याद नहीं करते ।~~ हर समय उन ग्वालिनों के ही गीत गाते हैं, उन्हीं की याद कर कर के आंसू बहाते हैं ।" अंतर्यामी भगवान उद्धव के मन की सभी बातें जानते थे । एक दिन भगवान ने कहा , "उद्धव ! गोपियाँ मेरी याद में बड़ी ही रोती हैं और दु:ख पाती हैं, मैं भी हमेशा उन्हीं को याद करता रहता हूँ, -- कैसे उन के घरों से माखन चुरा कर खाया करता था, कैसे यमुना जी के तट पर उन के दही और माखन लूटता था--- यही सब बातें मुझे बेचैन करती हैं , भैया तुम एक बार वृन्दावन चले जाओ ।तुम उन्हें यही समझाना कि वे मेरी याद करना छोड़ दे और अपने हृदय में भगवान का ध्यान करें । उन को यह भी समझाना कि जब तुम भगवान को दुःखी होकर याद करती हो तो भगवान भी तुम्हे याद करके दुःखी होते हैं । भैया उद्धव! ब्रह्मज्ञान का उपदेश देने से उन की विरह वेदना दूर हो जायगी और वे सुखी हो जायेगी ।" उद्धव ने कहा, " प्रभु! आप किसी भी बात की चिन्ता ना करें, मैं उन अबला नारियों को अच्छी प्रकार समझकर आऊँगा ।^ भगवान ने उद्धव को अपना मुकुट दिया, अपना ही पीताम्बर पहनाया, अपने ही सब कपड़े दिये और अपने ही रथ में बैठाकर वृन्दावन भेज दिया । वहां का प्रेम ने उद्धव को रास्ते में ही अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया- कांटे वस्त्रों में उलझकर मार्ग रोक रहे थे, यमुना की धारा प्रेम का गीत सुना रही थी । जब उद्धव जी वहाँ पहुँचे तो राधिका भी सभी गोपियों के बीच में बैठे भगवान की चर्चा कर रही थी, भगवान के रथ को दूर से आते हुए देख कर एक गोपी कहने लगी "देखो! कृपा कर के भगवान हमें दर्शन देने आ रहे हैं, वही मुकुट नज़र आता है और वही पीताम्बर पहने हुए हैं । जब उद्धव गोपियों के करीब पहुँचे तो भगवान को न देख कर गोपियाँ निराश हो गयीं, मगर भगवान का परम सखा जानकर उन्होंने उद्धव जी को दण्डवत-प्रणाम किया, बड़े आदर सहित आसन देकर बैठाया । गोपियों ने पूछा, "उद्धव जी! हमारे भगवान कुशल से तो हैं? " उद्धव जी कहने लगे "गोपियों ! भगवान तो सदा मंगल रुप ही हैं, मगर जब तुम उन्हें दुःखी होकर याद करती हो तो वे दुःखी हो जाते हैं, इसलिए तुम भगवान को भूलकर उन के निराकार स्वरूप का ध्यान करो, जो स्वरूप घट-घट में समाया हुआ है । जब तुम उनका ध्यान करोगी और तुम्हारा ध्यान उन्ही में लग जायगा तब तुम्हारा मोक्ष भी हो जाएगा फिर यह सारा वियोग का दुःख दूर हो जाएगा। " गोपियों ने कहा "उद्धव ! क्या तुम ये बातें सचमुच ही कह रहे हो या हमारे साथ हँसी कर रहे हो? जिस को तुम निराकार कह रहे हो, उस का कौन पिता है और कैन महतारी है? जिस निराकार का योगी लोग ध्यान करते है वही तो हमारे कृष्ण भगवान हैं! उनके साथ हमने अनेक प्रकार की लीलाएँ की हैं, अपने हाथों से उन्हे माखन-मिश्री खिलाया है । क्या अब उन्हीं को भूल जाने को कहते हो और निराकार का ध्यान बताते हो? मगर आम को छोड़कर बबूल की सेवा करने से क्या मिलेगा? सिवाय कष्ट के और कुछ नहीं मिल सकता, हमारा मन तो भगवान के सगुन रूप में अटक गया है जो कि तुम्हारा ब्रह्मज्ञान से नहीं निकल सकता । जब तुम सबमें ही एक ब्रह्म समझते हो तो क्या स्वयं ब्रह्म होकर ब्रह्म को ही उपदेश करने आये हो । जब ऐसा मानते हो कि--- 'एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति ' तो फिर बीच में द्वैत क्यों लाते हो?' इस प्रकार उस प्रेम धारा में उद्धव जी का सारा ब्रह्मज्ञान बह गया और वे खुद प्रेम का पाठ पढ़कर वापस लौट आये । 🙏🌹🌷🙏🌹

Comments (6)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Oct 8, 2025

🙏‼️ Shri Krishna Govind Hare Murari Hey nath Narayan Vasudeva ‼️🙏 Subha Ratri 🙏 Subha Ratri 🙏 Subha Ratri Jii 🙏🌹🌹

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Oct 8, 2025

Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna 🙏 Subha Ratri Jii 🙏🌹🌹

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Oct 8, 2025

🙏🙏🌹🙏🙏

Radhe Radhe

Radhe Radhe

Oct 8, 2025

🌹♥️गुड इवनिंग शुभ संध्या , बुधवार की शुभकामनाएं,* _*जी बहन जी*_*🌹🌹🌹अति सुंदर वेरी नाइस पोस्ट धन्यवाद जी!! आपको इस महीने के दूसरे बुधवार* एवं कार्तिक मास के प्रथम बुधवार शाम की बहुत-बहुत🔹 शुभकामनाएं जी//.//🌹🌹🌹💦

Radhe Radhe

Radhe Radhe

Oct 8, 2025

,🌹🌹 आज की शुभ संध्या में सबसे पहले महीने के दूसरे बुधवार शुभ संध्या की हार्दिक शुभकामनाएं एवं//््््््ॐ आप और आपके पूरे *परिवार* को कार्तिक स्नान शुभारंभ की हार्दिक शुभकामनाएं। "_"जी बहन जी"_"््््््ॐ।🌹🌹

Radhe Radhe

Radhe Radhe

Oct 8, 2025

🙏🙏🙏🙏🙏