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दोस्तों डिप्रेशन क्यों..? श्रीकृष्ण से कितना कुछ छूटा.! पहले मां छूटीं, फिर पिता छूटे.! फिर जो नन्द-यशोदा मिले, वे भी छूटे.! संगी-साथी भी छूटे, राधा भी छूटीं.! गोकुल छूटा, फिर मथुरा छूटी.! श्रीकृष्ण से जीवन भर कुछ न कुछ छूटता ही रहा. नहीं छूटा तो देवत्व, मुस्कान और सकारात्मकता.! श्रीकृष्ण दुःख नहीं उत्सव के प्रतीक हैं.! सब कुछ छूटने पर भी, कैसे खुश रहा जा सकता है, यह" श्रीकृष्ण "से अच्छा कोई नहीं सिखा सकता..! इसलिए दोस्तों भाईओ बहनों हमेशा खुश रहें, परिवार के साथ औरों को भी हंसाते रहें, व्यस्त रहें।🙏

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