
Rama Devi Sahu
87 days ago
*वृंदावनेश्वरी* *अर्थ*: वृंदावन + ईश्वरी = वृंदावन की देवी/स्वामिनी *किसे कहते हैं*: *श्री राधा रानी* को वृंदावनेश्वरी कहा जाता है। वृंदावन धाम की अधिष्ठात्री देवी, श्रीकृष्ण की आह्लादिनी शक्ति और प्राण-वल्लभा होने के कारण राधा जी का सबसे प्रसिद्ध नाम "वृंदावनेश्वरी" है। *क्यों कहते हैं*: 1. *वृंदावन की महारानी*: सम्पूर्ण वृंदावन धाम पर राधा रानी का आधिपत्य है। ब्रह्मवैवर्त पुराण में कहा गया है कि श्रीकृष्ण भी राधा जी की आज्ञा के बिना वृंदावन में एक पत्ता भी नहीं हिला सकते। 2. *भक्ति की स्वामिनी*: वृंदावन में प्रेम-भक्ति का साम्राज्य राधा जी का है। सारी गोपियाँ और वृंदावन के जीव-जंतु भी इन्हीं की सेवा में लगे रहते हैं। 3. *रास की देवी*: महारास की स्वामिनी होने से भी इन्हें वृंदावनेश्वरी कहते हैं। *वृंदावनेश्वरी राधा रानी के मुख्य मंदिर*: 1. *श्री राधावल्लभ मंदिर, वृंदावन* - यहाँ राधा जी प्रधान हैं, कृष्ण जी के साथ नहीं। 2. *श्री राधारमण मंदिर* - राधारमण जी के साथ वृंदावनेश्वरी स्वरूप में पूजित। 3. *बरसाना का श्रीजी मंदिर* - राधा जी का जन्मस्थान, यहाँ वे "लाडली लाल" के रूप में वृंदावनेश्वरी हैं। 4. *सेवा कुंज* - जहाँ आज भी राधा-कृष्ण नित्य रास करते हैं। *वृंदावनेश्वरी मंत्र*: _ॐ ह्रीं श्रीं वृंदावनेश्वर्यै नमः_ _ॐ वृन्दावनेश्वर्यै विद्महे कृष्णप्रियायै धीमहि तन्नो राधा प्रचोदयात्_ *विशेष बात*: वृंदावन में "राधे-राधे" बोलना ही सबसे बड़ा जप माना जाता है, क्योंकि यहाँ श्रीकृष्ण भी वृंदावनेश्वरी राधा जी का नाम जपते हैं। आप वृंदावनेश्वरी के बारे में और क्या जानना चाहते हैं? मंदिर, कथा या भजन?
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