
Rama Devi Sahu
2 days ago
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 26 सितम्बर 2026* *⛅दिन - शनिवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - दक्षिणायण* *⛅ऋतु - शरद* *⛅मास - भाद्रपद* *⛅पक्ष - शुक्ल* *⛅तिथि - पूर्णिमा रात्रि 10:18 तक तत्पश्चात् प्रतिपदा* *⛅नक्षत्र - पूर्व भाद्रपद सुबह 11:32 तक तत्पश्चात् उत्तर भाद्रपद* *⛅योग - गण्ड दोपहर 01:17 तक तत्पश्चात् वृद्धि* *⛅राहुकाल - सुबह 09:17 से सुबह 10:48 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 06:17* *⛅सूर्यास्त - 06:19 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:41 से प्रातः 05:29 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 11:54 से दोपहर 12:42 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 11:54 से मध्यरात्रि 12:42 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - भाद्रपद पूर्णिमा, भाद्रपदी पूर्णिमा का श्राद्ध, महालय श्राद्ध आरम्भ, संन्यासी चतुर्मास समाप्त* *🌥️विशेष - पूर्णिमा, श्राद्ध और व्रत के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* 👉🏻 *श्राद्ध पक्ष मे यह कार्य सभी को करना चाहिए*⤵ 🌷 *श्राद्ध में पालने योग्य नियम* 🌷 ➡ *26 सितम्बर 2026 शनिवार से महालय श्राद्ध आरम्भ होगा* 🙏🏻 *श्रद्धा और मंत्र के मेल से पितरों की तृप्ति के निमित्त जो विधि होती है उसे 'श्राद्ध' कहते हैं।* 🙏🏻 *हमारे जिन संबंधियों का देहावसान हो गया है, जिनको दूसरा शरीर नहीं मिला है वे पितृलोक में अथवा इधर-उधर विचरण करते हैं, उनके लिए पिण्डदान किया जाता है।* *बच्चों एवं संन्यासियों के लिए पिण्डदान नहीं किया जाता।* 🙏🏻 *विचारशील पुरुष को चाहिए कि जिस दिन श्राद्ध करना हो उससे एक दिन पूर्व ही संयमी, श्रेष्ठ ब्राह्मणों को निमंत्रण दे दे। परंतु श्राद्ध के दिन कोई अनिमंत्रित तपस्वी ब्राह्मण घर पर पधारें तो उन्हें भी भोजन कराना चाहिए।* 🙏🏻 *भोजन के लिए उपस्थित अन्न अत्यंत मधुर, भोजनकर्ता की इच्छा के अनुसार तथा अच्छी प्रकार सिद्ध किया हुआ होना चाहिए। पात्रों में भोजन रखकर श्राद्धकर्ता को अत्यंत सुंदर एवं मधुर वाणी से कहना चाहिए कि 'हे महानुभावो ! अब आप लोग अपनी इच्छा के अनुसार भोजन करें।'* 🙏🏻 *श्रद्धायुक्त व्यक्तियों द्वारा नाम और गोत्र का उच्चारण करके दिया हुआ अन्न पितृगण को वे जैसे आहार के योग्य होते हैं वैसा ही होकर मिलता है। (विष्णु पुराणः 3.16,16)* 🙏🏻 *श्राद्धकाल में शरीर, द्रव्य, स्त्री, भूमि, मन, मंत्र और ब्राह्मण-ये सात चीजें विशेष शुद्ध होनी चाहिए।* 🙏🏻 *श्राद्ध में तीन बातों को ध्यान में रखना चाहिएः शुद्धि, अक्रोध और अत्वरा (जल्दबाजी नही करना)।* *श्राद्ध में मंत्र का बड़ा महत्त्व है। श्राद्ध में आपके द्वारा दी गयी वस्तु कितनी भी मूल्यवान क्यों न हो, लेकिन आपके द्वारा यदि मंत्र का उच्चारण ठीक न हो तो काम अस्त-व्यस्त हो जाता है। मंत्रोच्चारण शुद्ध होना चाहिए और जिसके निमित्त श्राद्ध करते हों उसके नाम का उच्चारण भी शुद्ध करना चाहिए।* *जिनकी देहावसना-तिथि का पता नहीं है, उनका श्राद्ध अमावस्या के दिन करना चाहिए।* 🙏🏻 *हिन्दुओं में जब पत्नी संसार से जाती है तो पति को हाथ जोड़कर कहती हैः 'मुझसे कुछ अपराध हो गया हो तो क्षमा करना और मेरी सदगति के लिए आप प्रार्थना करना।' अगर पति जाता है तो हाथ जोड़ते हुए पत्नी से कहता हैः 'जाने-अनजाने में तेरे साथ मैंने कभी कठोर व्यवहार किया हो तो तू मुझे क्षमा कर देना और मेरी सदगति के लिए प्रार्थना करना।'* 🙏🏻 *हम एक दूसरे की सदगति के लिए जीते जी भी सोचते हैं, मरते समय भी सोचते हैं और मरने के बाद भी सोचते हैं।* 🙏🏻 🌷 *श्राद्ध विशेष* 🌷 🌞 *पूर्वजों को पितर पक्ष में इस मंत्र के द्वारा सूर्य भगवान को अर्ध्य देने से यमराज प्रसन्न होकर पूर्वजों को अच्छी जगह भेज देते हैं ।* 🌷 *ॐ धर्मराजाय नमः ।* 🌷 *ॐ महाकालाय नमः ।* 🌷 *ॐ म्रर्त्युमा नमः ।* 🌷 *ॐ दानवैन्द्र नमः ।* 🌷 *ॐ अनन्ताय नमः ।* *🙏🚩🚩 *" ll जय श्री राम ll "* 🚩🚩🙏*
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