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तीर्थ, यात्री और क्षेत्रीय विकास—सबका रास्ता आज भी काग़ज़ों में अटका *शंखेश्वर–विरमगाम रेल लाइन: 14 वर्षों से फाइलों में कैद जैन समाज की जीवनरेखा* *—भरतकुमार सोलंकी, मुंबई* शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन समाज का एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय तीर्थ है जहाँ हर दिन हज़ारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचते हैं। पालीताणा के बाद यह गुजरात का सबसे अधिक भीड़ वाला जैन तीर्थ माना जाता है। इसके बावजूद, शंखेश्वर आज भी देश के रेल नेटवर्क से कटा हुआ है। तीर्थयात्री आज भी विरमगाम, अहमदाबाद या मेहसाणा उतरकर असुरक्षित और अव्यवस्थित सड़क मार्ग से यात्रा करने को मजबूर हैं। यह केवल असुविधा नहीं, बल्कि अब यात्रियों की सुरक्षा और गरिमा से जुड़ा प्रश्न बन चुका है। बहुत कम लोगों को पता है कि *विरमगाम–शंखेश्वर–राधनपुर रेल लाइन* कोई नई मांग नहीं है। यह मांग *संसद के रिकॉर्ड में 22 वर्षों से दर्ज* है। दिनांक *27 फरवरी 2003* को लोकसभा में पूछे गए *Unstarred Question No.1567* (Rail Projects in Gujarat) के उत्तर में रेलवे मंत्रालय ने यह स्वीकार किया था कि गुजरात में कई नई रेल लाइनों के प्रस्ताव आए हैं, जिनमें *Radhanpur – Sami – Shankheshwar – Viramgam* नई लाइन भी शामिल है। इसके बाद रेल बजट *2011–12* में तत्कालीन रेल मंत्री ने *पैरा 128, उप-पैरा 17* में इस रूट के लिए *सर्वे की घोषणा* की। यही वह क्षण था, जब जैन समाज को लगा कि अब शंखेश्वर भी रेल मानचित्र पर आएगा। इस पूरी पहल के पीछे *कोयंबतूर निवासी रिखबचंद जैन* जैसे समर्पित साधर्मिकों की भूमिका थी, जिन्होंने 2011–12 में रेलवे में औपचारिक पेटिशन दायर कर इस लाइन को राष्ट्रीय एजेंडे तक पहुँचाया। लेकिन आज, *2026* में, 15 साल बाद भी स्थिति यह है कि— न सर्वे सार्वजनिक हुआ, न DPR बनी, न बजट मिला, न जमीन पर एक इंच रेल पटरियाँ बिछीं। रेलवे के बाद के संसदीय उत्तरों में साफ लिखा है कि इस रूट सहित कई नई लाइनों पर “प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, कुछ पर सर्वे भी पूरे हुए हैं, लेकिन संसाधनों की कमी और चल रही परियोजनाओं पर खर्च के कारण इन्हें आगे बढ़ाना संभव नहीं पाया गया।” यानी *शंखेश्वर रेल लाइन न रद्द हुई है, न स्वीकृत*—बस फाइलों में दबी हुई है। इधर हकीकत यह है कि पालीताणा–शंखेश्वर तीर्थ सर्किट पर हर साल लाखों जैन श्रद्धालु आते हैं। विरमगाम–शंखेश्वर सड़क मार्ग पहले से ही अत्यधिक भीड़भाड़, दुर्घटनाओं और टैक्सी माफिया से त्रस्त है। अहमदाबाद से राधनपुर, समी, शंखेश्वर की ओर जाने वाला पूरा क्षेत्र रेल से कटे होने के कारण विकास से वंचित है। यदि यह रेल लाइन बनती है तो— ✔️ अहमदाबाद से शंखेश्वर सीधा रेल संपर्क मिलेगा ✔️ जैन तीर्थयात्रियों की सुरक्षित, सस्ती और सम्मानजनक यात्रा संभव होगी ✔️ राधनपुर–समी–पाटन क्षेत्र को आर्थिक गति मिलेगी ✔️ भीड़भाड़ वाले सड़क मार्ग पर दबाव कम होगा आज यह सवाल केवल एक रेलवे लाइन का नहीं है। यह सवाल है—*क्या एक अंतरराष्ट्रीय जैन तीर्थ को 22 वर्षों तक सिर्फ फाइलों में जिंदा रखा जाएगा?* जैन समाज ने शांति से, संवैधानिक तरीके से यह मांग उठाई। पेटिशन दी। संसद में सवाल पूछे गए। रेल बजट में नाम आया। लेकिन सिस्टम की उदासीनता ने इसे अधर में लटका दिया। अब समय आ गया है कि *राधनपुर–समी –शंखेश्वर–विरमगाम* रेल लाइन की इस दबी हुई फाइल को फिर से खोला जाए, रेलवे बोर्ड के टेबल पर रखा जाए, और इसे “तीर्थ–कनेक्टिविटी परियोजना” के रूप में प्राथमिकता दी जाए। शंखेश्वर सिर्फ एक स्टेशन नहीं होगा — वह *जैन समाज की आस्था, सुरक्षा और सम्मान की रेल लाइन* होगी। *“यह केवल खबर नहीं, जैन समाज की आवाज़ है — कृपया इसे हर ग्रुप में साझा करें ताकि यह फाइल नहीं, आंदोलन बने।”* — भरतकुमार सोलंकी, मुंबई 📞9820085610

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