
Rama Devi Sahu
78 days ago
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 14 जून 2026* *⛅दिन - रविवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - ग्रीष्म* *⛅मास - अधिक ज्येष्ठ* *⛅पक्ष - कृष्ण* *⛅तिथि - चतुर्दशी दोपहर 12:19 तक तत्पश्चात् अमावस्या* *⛅नक्षत्र - रोहिणी रात्रि 10:14 तक तत्पश्चात् मृगशिरा* *⛅योग - धृति दोपहर 01:15 तक तत्पश्चात् शूल* *⛅राहुकाल - शाम 05:32 से शाम 07:14 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 05:41* *⛅सूर्यास्त - 07:14 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:17 से प्रातः 04:59 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:00 से दोपहर 12:54 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:06 से मध्यरात्रि 12:48 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - दर्श अमावस्या* *🌥️विशेष - चतुर्दशी व अमावस्या के दिन स्त्री - सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* *✨ सिद्ध निर्वाण वर्णन 2, सर्ग 243 📜* *🔴 हे विपश्चितों में श्रेष्ठ ! वही बधिक का महाशव🪦 था। जब उसका शरीर गिरा, तब भगवती🙏 ने उसका रक्तपान🩸 किया, इसलिए उसका नाम रक्ता—भगवती हुआ। उसके शरीर का शेष अंश सो पृथ्वी🌍 हुआ। जब चिरकाल⏳ व्यतीत हुआ, तब मृत्तिका🌱 पृथ्वी हो गई और उस पृथ्वी का नाम मेदिनी पड़ा। ब्रह्माजी🕉️ ने जो नवीन सृष्टि🌌 रची है उस पृथ्वी पर अब कल्याण🌸 हुआ है। इससे अब जहाँ तेरी इच्छा हो, वहाँ जा और मैं भी अब जाता हूँ। इन्द्र👼 को यज्ञ🔥 करना है और उन्होंने मेरा आवाहन किया है, वहाँ मैं जाता हूँ।* *🔴 भास बोले, हे राजा दशरथ👑 ! इस प्रकार मुझसे कहकर अग्नि देवता अन्तर्धान हो गये। जैसे महाश्याम मेघ☁️ से दामिनी⚡ चमक कर अन्तर्धान हो जाती है, वैसे ही अग्नि जब अन्तर्धान हो गये, तब मैं वहाँ से चला। और एक सृष्टि में गया तो वहाँ और प्रकार के शास्त्र📜 और ही प्रकार के प्राणी👥 देखे। फिर आगे और सृष्टि में गया तो वहाँ ऐसे प्राणी सृष्टियाँ देखी हैं और उनके भिन्न-भिन्न आचार भी देखे हैं। दशों दिशाओं🧭 में मैं फिरा हूँ और बहुत भोग भोगे हैं; बड़ी-बड़ी विभूति पाई और देखी और अनेक प्रकार की चेष्टाएँ की हैं, परन्तु मुझको सब स्वप्न💭 प्रतीत हुआ, क्योंकि सब भोग पदार्थ और कर्म⚙️ अविद्या के रचे हुए हैं।* *🔴 उसी अविद्या🌫️ का अन्त लेने को मैं अनेक युग पर्यन्त फिरा, पर अन्त कहीं न पाया। वशिष्ठजी🧘♂️ की कृपा से अब मुझको स्वरूप का साक्षात्कार👁️ हुआ, अविद्या नष्ट हुई और मैं परमानन्द😇 को प्राप्त हुआ हूँ।* *🔴 इति श्रीयोगवाशिष्ठे निर्वाणप्रकरणे विपश्चित् देशान्तरभ्रम वर्णनंनाम द्विशताधिकत्रिचत्वारिंशत्तमस्सर्गः ।। २४३ ।। 🌺* *🌌 स्वर्ग नरक प्रारब्ध वर्णन 1, सर्ग 244 📜* *🔴 वाल्मीकिजी बोले, हे साधो ! जब इस प्रकार विपश्चित् ने कहा, तब सायंकाल हुआ और सूर्य☀️ अन्तर्धान हो गये—मानो विपश्चित् का वृत्तान्त देखने को अन्य सृष्टि में गये—और नौबत-नगाड़े🥁 बजने लगे, मानो राजा दशरथ की जय-जय🏆 करते हैं। उस समय राजा दशरथ ने धन💰, रत्न💎 और वस्त्राभूषण से राजा विपश्चित् का यथायोग्य पूजन🙏 किया। दशरथ आदि सब राजाओं ने वशिष्ठजी को प्रणाम किया और परस्पर प्रणाम करके सब सभासद् अपने-अपने स्थानों को गये। सबने स्नान🛁 करके यथाक्रम भोजन🍽️ किया और नियम करके विचार-सहित रात्रि🌙 व्यतीत की। जब सूर्य की किरणें✨ उदय🌅 हुईं तो फिर अपने-अपने स्थान पर आकर परस्पर नमस्कार करके बैठे।* *🔴 तब वशिष्ठजी पूर्व के प्रसंग को लेकर बोले, हे राम ! यह अविद्या अविद्यमान है। है नहीं, पर भासित होती है, यही आश्चर्य😲 है। जो वस्तु सदा विद्यमान है, वह नहीं भासित होती। अविद्या है नहीं, पर सदा भासित होती है, इसी से इसका नाम अविद्या है।* *🔴 हे राम ! आत्मसत्ता✨ अनुभवरूप🧠 है। इसका अनुभव होना अनिश्चित हो रहा है। अविद्याकृत जगत्🌍 जो कभी कुछ हुआ नहीं वह स्पष्ट होकर भासित होता है-यही अविद्या है।* *🙏🚩🚩 *" ll जय श्री राम ll "* 🚩🚩🙏*

Comments (4)

Rama Devi Sahu
Jun 14, 2026
🌹🌹 Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna 🌹 Shubha Ratri Vandan Ji 🌹🌹

बरखा शर्मा
Jun 14, 2026
जय श्री कृष्ण जी शुभ प्रभात जी 🌹

Rama Devi Sahu
Jun 14, 2026
🌹🌹 Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna 🌹 Suprabhat Ji 🌹🌹

सविता
Jun 14, 2026
Radhe radhe 🙏🌹 jai shree krishna ji 🌹🙏 shubh prabhat vandan ji
