
Rama Devi Sahu
188 days ago
|| जय श्री राधा माधव || *_"कितना भी कमा लो, कितना कुछ बना लो; जब तक अंधी होड़ की दौड़ में रहोगे, तब तक जीवन में ठहराव आना संभव नहीं।"_* ~ हरिॐ जी ~ भावार्थ : *मनुष्य चाहे जितना धन, पद या उपलब्धियाँ अर्जित कर ले; यदि वह निरंतर तुलना, प्रतिस्पर्धा और आगे निकलने की अंधी दौड़ में उलझा रहेगा, तो उसके भीतर शांति और संतोष का अनुभव नहीं हो सकता।* व्याख्या : अंधी होड़ की दौड़ मन को हमेशा असंतुष्ट रखती है। एक लक्ष्य पूरा होते ही दूसरा लक्ष्य सामने खड़ा हो जाता है। ऐसे में *जीवन केवल “और चाहिए” की चाह में बहता रहता है।* *ठहराव तब आता है जब मन दौड़ना छोड़कर संतोष, स्वीकार और आत्मबोध की ओर मुड़ता है।* *_सच्चा सुख उपलब्धियों में नहीं, बल्कि यह जानने में है कि कब रुकना है और कब पर्याप्त है।_* || श्री गुरु चरणं | श्री कृष्ण शरणम् ||
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