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Rama Devi Sahu

11 hours ago

भाद्रपद शुक्ल तृतीया के अवसर पर भारतीय स्त्री-जीवन में एक विशिष्ट उल्लास दिखाई देता है। हाथों पर सजी मेहंदी, माँग में सिंदूर, चूड़ियों की खनक और पारंपरिक श्रृंगार के बीच मन में एक संकल्प आकार लेता है—हरतालिका तीज। ___________ गणेश चतुर्थी से एक दिन पूर्व मनाया जाने वाला यह पर्व केवल व्रत और पूजा तक सीमित नहीं है। यह उस स्त्री-चेतना की स्मृति भी है, जो प्रेम को केवल प्राप्त करने की आकांक्षा के रूप में नहीं, बल्कि अपनी पसंद और निर्णय पर दृढ़ रहने के साहस के रूप में देखती है। ___________ पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। जब उनके पिता हिमालय ने उनका विवाह भगवान विष्णु से करने का निर्णय लिया, तब पार्वती अपनी सखी के साथ वन में चली गईं, ताकि अपनी इच्छा के विरुद्ध विवाह न करना पड़े। ___________ वहाँ उन्होंने भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए तप किया। अंततः शिव उनकी तपस्या से प्रसन्न हुए और उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार करने का वर प्रदान किया। इसी कथा से हरतालिका तीज का संबंध माना जाता है। ‘हरतालिका’ शब्द को ‘हरत’ और ‘आलिका’—अर्थात् सखी द्वारा साथ ले जाने—से जोड़ा जाता है। _________ इस कथा का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि पार्वती केवल किसी वर की प्रतीक्षा करती हुई स्त्री नहीं थीं। उन्होंने अपनी इच्छा को पहचाना, उसके लिए तपस्या की और अपने जीवन का निर्णय स्वयं लिया। ___________ इस कथा में उनकी सखी की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, वह ऐसी स्त्री का प्रतीक है, जो दूसरी स्त्री की इच्छा को समझती है और उसके साथ दृढ़ता से खड़ी रहती है। _________ इसीलिए हरतालिका तीज का अर्थ केवल पति की दीर्घायु की कामना तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह उस विश्वास का पर्व भी है कि स्त्री के मन की अपनी इच्छाएँ, अपनी पसंद और अपने संकल्प होते हैं। ___________ आज भी जब कोई स्त्री तीज का निर्जला व्रत रखती है और शिव-पार्वती की पूजा करती है, तो उसकी प्रार्थना में जीवनसाथी के सुख और दीर्घायु की कामना के साथ-साथ घर की शांति, रिश्तों की मधुरता और अपने जीवन के मंगल की आकांक्षा भी शामिल होती है। ____________ शायद इसी कारण तीज में स्त्री-सौंदर्य का इतना गहरा भाव दिखाई देता है.. यह स्त्री को केवल सजाती नहीं, बल्कि उसके भीतर के विश्वास को भी सुदृढ़ करती है। ___________ झूले की ऊँचाई से लेकर मेहंदी के रंग तक, सखी की हँसी से लेकर पूजा की शांति तक... हरतालिका तीज स्त्री को कुछ समय के लिए उसके दैनिक जीवन से अलग कर उसके अपने अंतर्मन के निकट ले आती है। ____________ जहाँ वह केवल किसी की पत्नी नहीं होती, किसी की बहू नहीं होती, किसी की माँ नहीं होती... वह स्वयं होती है। अपनी इच्छा, अपने विश्वास और अपने प्रेम के साथ।

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