
Rama Devi Sahu
51 days ago
श्रीकृष्ण को कभी श्याम, कभी काला और कभी नीले रंग का क्यों दिखाया जाता है? यदि तुम कृष्ण को केवल रंग से पहचानोगे, तो कृष्ण तुम्हारे हाथ से छूट जाएंगे। क्योंकि कृष्ण का रंग शरीर का नहीं, चेतना का रंग है। कृष्ण को श्याम कहा गया। श्याम का अर्थ केवल काला नहीं होता। श्याम का अर्थ है— इतना गहरा कि जिसकी गहराई का अंत न मिले। रात श्याम है। अनंत आकाश श्याम है। ब्रह्मांड की अथाह गहराई श्याम है। कृष्ण उसी अनंत का प्रतीक हैं उन्हें नीला भी दिखाया जाता है। क्यों? क्योंकि जब तुम ऊपर देखते हो, आकाश नीला दिखाई देता है। जब तुम समुद्र को देखते हो, वह भी नीला दिखाई देता है। दोनों अनंत हैं। दोनों की कोई सीमा दिखाई नहीं देती। इसलिए भारतीय ऋषियों ने कृष्ण को नीला रंग दिया। यह रंग शरीर का नहीं, अनंतता का प्रतीक है। कृष्ण किसी जाति, किसी रंग, किसी देश के नहीं हैं। वे उतने ही गहरे हैं, जितना आकाश। वे उतने ही रहस्यमय हैं, जितना ब्रह्मांड। इसलिए उनका रंग भी साधारण नहीं हो सकता था। जब बादल वर्षा लेकर आते हैं,तो वे काले दिखाई देते हैं। लेकिन वही बादल पृथ्वी को जीवन देते हैं। इसीलिए कृष्ण को घनश्याम कहा गया। वे उस वर्षा के बादल हैं, जो सूखी चेतना पर प्रेम बरसाते हैं। आज मनुष्य गोरे रंग के पीछे भाग रहा है। कृष्ण कहते हैं— "सुंदरता रंग में नहीं, चेतना में है।" यदि रंग ही सुंदरता होता, तो भारतीय संस्कृति अपने सबसे प्रिय आराध्य को श्यामवर्ण क्यों कहती? कृष्ण हमें सिखाते हैं— आकाश का कोई रंग नहीं, फिर भी वह नीला दिखाई देता है। परमात्मा का भी कोई रूप नहीं, फिर भी मनुष्य उसे अपने अनुभव के अनुसार रूप देता है। इसलिए कृष्ण का नीला या श्याम रंग किसी शरीर का वर्णन नहीं, अनंत, रहस्य, गहराई और विराट चेतना का प्रतीक है। इसलिए अगली बार जब कोई पूछे— "कृष्ण नीले क्यों हैं?" तो उत्तर देना— क्योंकि आकाश का कोई अंत नहीं। समुद्र की कोई सीमा नहीं। और कृष्ण की चेतना भी किसी सीमा में नहीं समाती। इसीलिए वे श्याम हैं। इसीलिए वे नील हैं। और इसी कारण वे आज भी अनंत के सबसे सुंदर प्रतीक हैं।

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