
Rama Devi Sahu
203 days ago
🌺 ओ पालनहारे निर्गुण और न्यारे🌺 🍀 "शिशुपाल जी आप तो एक श्रेष्ठ पुरुष है यह उदासी आप छोड़ दीजिए क्योंकि राजन कोई भी बात सर्वदा अपने मन के अनुकूल ही हो या प्रतिकूल इस संबंध में कुछ ठीक था किसी भी प्राणी के जीवन में नहीं देखी जाती! जैसे कठपुतली बाजीगर की इच्छा के अनुसार नाचती है वैसे ही यह जीव भी भगवतइच्छा के अधीन रहकर सुख और दुख के संबंध में यथाशक्ति चेष्टा करता रहता है! देखिए श्रीकृष्ण ने मुझे तेईस तेईस अक्षोहिणी सेनाओं के साथ सत्रह बार हरा दिया! मैंने केवल एक बार, अठारवीं बार उन पर विजय प्राप्त की फिर भी इस बात को लेकर मैं ना तो कभी सुख करता हूं ना कभी हर्ष! क्योंकि मैं जानता हूं कि प्रारब्ध के अनुसार काल भगवान इस चराचर जगत को झकझोरते रहते हैं! इसमें संदेह नहीं कि हम लोग बड़े-बड़े वीर सेनापतियों के नायक हैं! फिर भी इस समय श्रीकृष्ण के द्वारा सुरक्षित यदुवंशियों की थोड़ी सी सेना ने हमें हरा दिया! इस बार हमारे शत्रुओं की ही जीत हुई कि काल उनके अनुकूल था! जब काल हमारे दाहिने होगा तब हम भी उन्हें जीत लेंगे! क्षत्रियों ने इस प्रकार समझाया तब शिशुपाल अपने अनुयायियों के साथ अपनी राजधानी को लौट गया और उसके मित्र भी जो मरने से बचे थे अपने-अपने घरों को चले गये। (श्रीमद्भागवत महापुराण) 🍃 बोल हरि बोल हरि हरि हरि बोल केशव माधव गोविंद बोल।🍃
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!
