
Rama Devi Sahu
174 days ago
*जानकारियां: गंगा जल खराब क्यों नहीं हो* . ♥️ अमेरिका में एक लीटर गंगाजल 250 डालर में क्यों मिलता है? सर्दी के मौसम में कई बार खांसी हो जाती है। तो जब डॉक्टर से खांसी ठीक नही हुई तो किसी ने बताया कि डाक्टर से खांसी ठीक नहीं होती तब गंगाजल पिलाना चाहिए। गंगाजल तो मरते हुए व्यक्ति के मुंह में डाला जाता है, हमने तो ऐसा सुना है| तो डॉक्टर साहिब बोले, नहीं कई रोगों का भी इलाज है। दिन में तीन बार दो-दो चम्मच गंगाजल पिया और तीन दिन में खांसी ठीक हो गई। यह हमारा अनुभव है, हम इसे गंगाजल का चमत्कार नहीं मानते, उसके औषधीय गुणों का प्रमाण मानते हैं। कई इतिहासकार बताते हैं कि सम्राट अकबर स्वयं तो गंगा जल का सेवन करते ही थे, मेहमानों को भी गंगा जल पिलाते थे। इतिहासकार लिखते हैं कि अंग्रेज जब कलकत्ता से वापस इंग्लैंड जाते थे, तो पीने के लिए जहाज में गंगा का पानी ले जाते थे, क्योंकि वह सड़ता नहीं था। इसके विपरीत अंग्रेज जो पानी अपने देश से लाते थे वह रास्ते में ही सड़ जाता था। करीब सवा सौ साल पहले आगरा में तैनात ब्रिटिश डाक्टर एम ई हॉकिन ने वैज्ञानिक परीक्षण से सिद्ध किया था कि हैजे का बैक्टीरिया गंगा के पानी में डालने पर कुछ ही देर में मर गया। दिलचस्प ये है कि इस समय भी वैज्ञानिक पाते हैं कि गंगा में बैक्टीरिया को मारने की क्षमता है। लखनऊ के नेशनल बोटैनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट एनबीआरआई के निदेशक डॉक्टर चंद्र शेखर नौटियाल ने एक अनुसंधान में प्रमाणित किया है कि गंगा के पानी में बीमारी पैदा करने वाले ई कोलाई बैक्टीरिया को मारने की क्षमता बरकरार है। डॉ नौटियाल का इस विषय में कहना है कि गंगा जल में यह शक्ति गंगोत्री और हिमालय से आती है। गंगा जब हिमालय से आती है तो कई तरह की मिट्टी, कई तरह के खनिज, कई तरह की जड़ी बूटियों से मिलती मिलाती है। कुल मिलाकर कुछ ऐसा मिश्रण बनता जिसे हम अभी नहीं समझ पाए हैं। डॉक्टर नौटियाल ने परीक्षण के लिए तीन तरह का गंगा जल लिया था। उन्होंने तीनों तरह के गंगा जल में ई-कोलाई बैक्टीरिया डाला। नौटियाल ने पाया कि - - ताजे गंगा पानी में बैक्टीरिया तीन दिन जीवित रहा, -आठ दिन पुराने पानी में एक एक हफ्ते और - सोलह साल पुराने पानी में 15 दिन। यानी तीनों तरह के गंगा जल में ई कोलाई बैक्टीरिया जीवित नहीं रह पाया। वैज्ञानिक कहते हैं कि गंगा के पानी में बैक्टीरिया को खाने वाले बैक्टीरियोफाज वायरस होते हैं। ये वायरस बैक्टीरिया की तादाद बढ़ते ही सक्रिय होते हैं और बैक्टीरिया को मारने के बाद फिर छिप जाते हैं। मगर सबसे महत्वपूर्ण सवाल इस बात की पहचान करना है कि गंगा के पानी में रोगाणुओं को मारने की यह अद्भुत क्षमता कहाँ से आती है? दूसरी ओर एक लंबे अरसे से गंगा पर शोध करने वाले आईआईटी रुड़की में पर्यावरण विज्ञान के रिटायर्ड प्रोफेसर देवेंद्र स्वरुप भार्गव का कहना है कि गंगा को साफ रखने वाला यह तत्व गंगा की तलहटी में ही सब जगह मौजूद है। डाक्टर भार्गव कहते हैं कि गंगा के पानी में वातावरण से आक्सीजन सोखने की अद्भुत क्षमता है। भार्गव का कहना है कि दूसरी नदियों के मुकाबले गंगा में सड़ने वाली गंदगी को हजम करने की क्षमता 15 से 20 गुना ज्यादा है। गंगा माता इसलिए है कि गंगाजल अमृत है! इसलिए उसमें मुर्दे, या शव की राख और अस्थियां विसर्जित नहीं करनी चाहिए, क्योंकि मोक्ष कर्मो के आधार पर मिलता है। जैसी करनी वैसी भरनी! Note : (जब तक अंग्रेज किसी बात को नहीं कहते आधुनिक मानने वाले भारतीय सत्य नहीं मानते, इसलिए इस आलेख को वैज्ञानिकों के वक्तव्य सहित BBC बीबीसी हिन्दी सेवा से साभार लिया गया है।👌👌 🪷 __ *मस्त रहो स्वस्थ रहो व्यस्त रहो 😇* *नित नेम याद करो शिव जी परमात्मा को 😇🙏*
Comments (5)

Rama Devi Sahu
Mar 9, 2026
Mantra:- Om Gangeicha Jamunecha Godavari Narmade Sindhu Kaveri Jalaswinag Sanidhyang kuru.. Kurukshetra Ganga Prabhas Puskarni Scha Eetanani Phal Pradain Snankale Bhavnti Dwa...

Rama Devi Sahu
Mar 9, 2026
Ji, Thik kaha ✅ Shukriya 🙏 Nahane ke Samay me Ye Punya bhumi ka Pavitra Nadiyon ki Naam Ucharan karte hai na...Tho or Pavitra ho jata hai..., Ganga, Yamuna, Godavari Narmade Sindhu Kaveri.... 🙏 Nahane ke Samay pr Ek Mantra hai....

Rama Devi Sahu
Mar 9, 2026
Ji, Mere Post se Aap tho Adhik Jankari di.. Bahut bahut Dhanyawad Jii 🌹 Har Har Mahadev 🙏 Har Har Gange 🙏🌿🌹

R k jangid phulera Jaipur
Mar 9, 2026
सब रोगों की एक ही दवा मां गंगा का पानी मानो तो गंगा मां हूं ना मानो तो बहता पानी बहुत ही सुंदर पोस्ट 🙏

Srikumar महाराज🇮🇳☸️
Mar 9, 2026
नमस्ते 🙏राम राम राणाजी बहुत ही दिलचस्प पोस्ट! यहाँ कुछ और रोचक तथ्य दिए गए हैं। 🙏गंगा नदी का जल हमेशा शुद्ध क्यों रहता है? गंगा नदी का जल हमेशा शुद्ध रहने के कई कारण हैं: 1. *प्राकृतिक शुद्धिकरण*: गंगा नदी में कई प्रकार के प्राकृतिक शुद्धिकरण तत्व होते हैं, जैसे कि जल में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस और अन्य हानिकारक जीवाणुओं को मारने वाले तत्व। 2. *गंगा के जल में ऑक्सीजन की अधिकता*: गंगा के जल में ऑक्सीजन की अधिकता होती है, जो जल को शुद्ध रखने में मदद करती है। 3. *गंगा के जल में मौजूद खनिज*: गंगा के जल में कई प्रकार के खनिज होते हैं, जैसे कि कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटैशियम, जो जल को शुद्ध रखने में मदद करते हैं। 4. *गंगा के जल का प्रवाह*: गंगा का जल बहुत तेजी से बहता है, जिससे जल में मौजूद हानिकारक तत्व बह जाते हैं। 5. *गंगा के जल में मौजूद पौधे*: गंगा के जल में कई प्रकार के पौधे होते हैं, जो जल को शुद्ध रखने में मदद करते हैं। 6. *गंगा के जल का तापमान*: गंगा का जल तापमान हमेशा कम रहता है, जिससे जल में मौजूद हानिकारक जीवाणुओं की वृद्धि नहीं हो पाती। 7. *गंगा के जल का पीएच मान*: गंगा के जल का पीएच मान हमेशा 7 के आसपास रहता है, जो जल को शुद्ध रखने में मदद करता है। इन सभी कारणों से गंगा नदी का जल हमेशा शुद्ध रहता है।
