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Rama Devi Sahu

73 days ago

🕉️ अर्जुन के अलावा और चार कौन लोग थे जिन्होंने गीता का अमूल्य ज्ञान सुना ?............✍️ 🕉️ गीता का ज्ञान सिर्फ अर्जुन ने ही नहीं सुना था, बल्कि अर्जुन के अलावा चार और ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने गीता का वह अमूल्य ज्ञान सुना। और उन में से एक तो युद्ध भूमि में उपस्थित भी नहीं था। 🕉️ आखिर कौन थे वो चार लोग और उन्हें गीता का ज्ञान कैसे प्राप्त हुआ। इस रहस्य के बारे में अवश्य जाने। 🕉️ आप कल्पना किजिए वह कुरुक्षेत्र का मैदान जिसमें एक तरफ कौरवों की सेना थी तो दूसरी तरफ पांडवो की सेना खड़ी थी। 🕉️ युद्ध शुरू ही होने वाला था कि अर्जुन का हृदय डगमगा जाता है। वह अपने ही गुरुओं, बंधुओं और रिश्तेदारों को सामने खड़ा देख लेते हैं। 🕉️ अर्जुन का गांडीव हाथ से ढीला पड़ जाता है। तभी श्री कृष्ण बोलना शुरू करते हैं, यही वह क्षण था जब गीता का जन्म हुआ! 🕉️ सबसे पहले श्रोता थे अर्जुन, क्योंकि सारे प्रश्न भी उन्हीं के थे, संशय भी उन्हीं के थे और उत्तर भी उन्हीं के लिए दिए जा रहे थे। लेकिन सुनने वाले केवल अर्जन ही नहीं थे बल्कि वहां उनके रथ की ध्वज पर विराजमान थे स्वयं हनुमानजी कपिध्वज। कहा जाता है कि वो उस वक्त मौन साक्षी बने, उन्होंने श्री कृष्ण के मुख से निकले हर शब्द को सुना। राम भक्त हनुमान श्री कृष्ण के मुख से ब्रह्मज्ञान सुन रहे थे। 🕉️ इसके बाद दूसरे थे धृतराष्ट्र, वो युद्ध भूमि में उपस्थित नहीं थे, वे देख भी नहीं सकते थे। लेकिन उन्हें युद्ध भूमि का हर दृश्य सुनाई दे रहा था। क्योंकि महर्षि वेदव्यास जी ने संजय को दिव्य दृष्टि प्रदान की, संजय केवल युद्ध देख ही नहीं रहे थे बल्कि अर्जुन और श्रीकृष्ण के बीच के संवाद को भी सुन रहे थे। वहीं संवाद वो धृतराष्ट्र को भी सुना रहे थे। 🕉️ वहां एक और श्रोता थे वो थे बर्बरीक। वही बर्बरीक जिन्हें आज हम खाटूश्यामजी के नाम से जानते हैं। युद्ध शुरू होने से पहले ही श्री कृष्ण ने बर्बरीक का शीश दान में मांग लिया था। बर्बरीक ने बिना किसी संकोच के अपना सिर अर्पित कर दिया। 🕉️ भगवान श्री कृष्ण बर्बरीक के इस त्याग से बहुत प्रसन्न हुए। श्री कृष्ण ने बर्बरीक को एक वरदान दिया, उन्होंने बर्बरीक के शीश को एक ऊंचे पर्वत पर स्थापित कर दिया। ताकि वे पूरे महाभारत युद्ध को देख सकें। वहीं से ही बर्बरीक ने युद्ध का प्रत्येक दृश्य देखा। जब गीता का उपदेश दिया गया तब वे भी उस पावन संवाद के साक्षी बने। 🕉️ सोचिए एक तरफ अर्जन, जिनके लिए गीता का उपदेश दिया गया। दूसरी ओर हनुमान जी जो रथ के धवज पर विराजमान थे। फिर संजय जिन्हें दिव्य दृष्टि प्राप्त थी। इसके बाद धृतराष्ट्र जो संजय के माध्यम से सब सुन रहे थे। एक थे बर्बरीक जो युद्ध भूमि से दूर होकर भी उस दिव्य ज्ञान के साक्षी बन रहे थे। 🕉️ यही कारण है कि गीता सिर्फ एक योद्धा के लिए दिया गया उपदेश नहीं थी। यह ऐसा ज्ञान था जिसे सुनने के लिए देवता, भक्त और महापुरुष तक उत्सुक थे। शायद यही वजह है कि हजारों वर्ष बाद भी गीता के वे शब्द करोड़ों लोगों का मार्ग दर्शन कर रहे हैं। क्योंकि वह संवाद सिर्फ अर्जुन के लिए नहीं था बल्कि वह संपूर्ण मानवता के लिए था जय श्री कृष्णा जी राधे राधे जी शुभ संध्या वंदन जी 🙏🙏

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