
Rama Devi Sahu
42 days ago
बरसाना में रहने वाले एक वृद्ध संत, जो पिछले ८० वर्षों से नियमपूर्वक राधा रानी के दर्शन कर रहे थे, उनके मन में विचार आया कि उन्होंने आज तक अपनी किशोरी जी को कुछ अर्पित नहीं किया। इसी भाव से भावुक होकर उन्होंने स्वयं अपने हाथों से एक सुंदर लहंगा-चुनरिया तैयार की। जब वे बड़े चाव से उस पोशाक को मंदिर चढ़ाने जा रहे थे, तब रास्ते में एक छोटी बालिका (लाली) ने उनसे वह पोशाक ज़िद करके मांग ली और संत के मना करने पर उसे छीनकर भाग गई। संत अत्यंत दुखी होकर मंदिर की सीढ़ियों पर बैठ गए और रोने लगे कि उनकी भेंट राधा रानी तक नहीं पहुँच सकी। अन्य संतों के समझाने पर जब वे अनमने मन से मंदिर के भीतर दर्शन करने गए, तो पट खुलते ही वे दंग रह गए। जो लहंगा-चुनरिया वह छोटी बालिका छीनकर भागी थी, वही पोशाक साक्षात राधा रानी धारण किए हुए थीं। तब उन्हें बोध हुआ कि वह बालिका स्वयं किशोरी जी थीं, जिनसे भक्त का प्रेम देखा नहीं गया और उन्होंने मंदिर पहुँचने से पहले ही भक्त की भेंट स्वीकार कर ली। निष्कर्ष: यह कथा सिखाती है कि भगवान केवल बाहरी वस्तुओं के नहीं, बल्कि भक्त के शुद्ध प्रेम और भाव के भूखे होते हैं।

Comments (4)

Saumya Sharma
Jul 19, 2026
बहुत ही सुंदर पोस्ट के साथ संत जी की बेहतरीन भावनात्मक कथा 👌👌👌 किशोरी जी की कृपा आप सपरिवार पर सदैव ही बनी रहे 🙏 मेरी प्यारी दी 🙏 यही प्रार्थना है 🙏🌹☺️

Saumya Sharma
Jul 19, 2026
ॐ भास्कराय नमः 🙏 जगत् को प्रकाशित करने वाले भगवान भास्कर आपके जीवन में भी खुशियों की बरसात करते रहें 🙏 इसी शुभकामना के साथ सुप्रभात वंदन मेरी प्यारी दी 🙏🌹☺️

Saumya Sharma
Jul 19, 2026
जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी 🙏🌹☺️ सही बात है जो पूरे श्रद्धा भाव से इन्हें पुकारे तो उस भक्त की पुकार मेरी राधा रानी सरकार जरूर सुनती हैं 🙏🌹☺️

Saumya Sharma
Jul 19, 2026
जय श्री राधे कृष्ण दीदी 🙏🌹☺️
