
Srikumar महाराज🇮🇳☸️
216 days ago
*वक़्त का इशारा समझिए।* नदी तब तक बहती है, जब तक रास्ता मिलता है। जिस दिन रास्ता पत्थरों से भर जाता है, वह खुद ही मोड़ ले लेती है। उसे शिकायत नहीं होती, न ही शोर मचाती है। इंसानी रिश्ते भी कुछ ऐसे ही होते हैं। जब सामने वाला जवाब देना छोड़ दे, सुनना छोड़ दे, आपकी मौजूदगी से बचने लगे तो समझ जाइए कि बहाव बदल चुका है। तब खुद को साबित करने की कोशिश मत कीजिए। सफ़ाई देना भी बेकार होता है। सबसे बेहतर यही है कि इज़्ज़त के साथ पीछे हट जाएँ। क्योंकि जहाँ ठहरना पड़ता है, वहाँ रिश्ता नहीं, बोझ बन जाता है।

Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!
