
Rama Devi Sahu
7 days ago
मोर मुकुट सिर कानन कुण्डल भजन मोर मुकुट सिर कानन कुण्डल, नैन रसीले मुख शशि मंडल, हरि सम और न कोई रे, सखी मेरो प्रीतम सोई रे।। मधुर मुरलियां अधरन राजे, गल बैजन्ती माला साजे, हरि सम और न कोई रे, सखी मेरो प्रीतम सोई रे।। नील कलेवर पट पीताम्बर, अंग धरे कान्हा कुंजन केलि करे, हरि सम और न कोई रे, सखी मेरो प्रीतम सोई रे।।कौस्तुभमणि श्रीवक्ष की रेखा, ऐसा श्रीधन और न देखा, श्री सर्वांग सजोई रे, सखी मेरो प्रीतम सोई रे।। नखशिख वर्णन कहत न आवै, कोटिक मनमथ देख लजावै, देखत सुध-बुध खोई रे, सखी मेरो प्रीतम सोई रे।। मोर मुकुट सिर कानन कुण्डल, नैन रसीले मुख शशि मंडल, हरि सम और न कोई रे, सखी मेरो प्रीतम सोई रे।। 🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼
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