
Rama Devi Sahu
22 days ago
पुरी श्रीमंदिर की रसोई: विश्व की सबसे बड़ी और प्राचीन रसोई पुरी श्रीमंदिर का रसोईघर (रोषघर) विश्व की सबसे बड़ी और प्राचीन कार्यक्षम रसोई है। यहाँ प्रतिदिन हजारों भक्तों के लिए शुद्ध महाप्रसाद (अबढ़ा) तैयार किया जाता है। इस रसोईघर का प्रबंधन और महाप्रसाद बनाने की प्रणाली पूरी तरह से अनूठी और पारंपरिक है। विशाल रसोईघर की संरचना स्थान: यह विशाल रसोईघर श्रीमंदिर के बाहरी परिसर (बाहर बेढ़ा) की दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित है। मिट्टी के चूल्हे: यहाँ लगभग २४० विशाल मिट्टी के चूल्हे हैं, जिन्हें 'अन्न चूल्हा', 'आहुआ' और 'पीठा चूल्हा' आदि विभिन्न श्रेणियों में बाँटा गया है। पवित्र जल: रसोई के लिए किसी सामान्य पानी का उपयोग नहीं किया जाता। रसोईघर के पास स्थित दो पवित्र कुओं—'गंगा' और 'यमुना' से जल निकालकर महाप्रसाद तैयार किया जाता है। सेवायात (सेवक): सुआर और महासुआर समुदाय के सैकड़ों सेवक अत्यंत निष्ठा और शुद्धता के साथ अपने मुँह पर कपड़ा (टुका) बाँधकर यहाँ भोजन पकाते हैं। अद्भुत रसोई प्रणाली महाप्रसाद बनाने की प्रक्रिया आज के आधुनिक विज्ञान को भी आश्चर्यचकित कर देती है: केवल मिट्टी के बर्तन: यहाँ रसोई के लिए धातु (एल्युमीनियम या स्टील) के बर्तनों के बजाय केवल नए मिट्टी के बर्तनों का उपयोग किया जाता है, जिन्हें 'कुडुआ' कहा जाता है। इन कुडुआ का उपयोग केवल एक बार किया जाता है। लकड़ी का ईंधन: गैस या कोयले के स्थान पर केवल लकड़ी को ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है। रथयात्रा के बाद बचे हुए रथ के काठ (लकड़ी) का उपयोग भी इसी रसोईघर में होता है। एक के ऊपर एक ७ कुडुआ: चूल्हे पर खाना पकाते समय ७ मिट्टी के कुडुआ एक के ऊपर एक रखे जाते हैं। सबसे आश्चर्य की बात यह है कि आग सबसे नीचे के बर्तन में लगने के बावजूद, सबसे ऊपर वाले कुडुआ का भोजन सबसे पहले पकता है और फिर नीचे के बर्तनों का भोजन क्रमानुसार पकता है। सामग्री की विशिष्टता (क्या उपयोग होता है और क्या नहीं) श्रीमंदिर की रसोई में किसी भी आधुनिक या विदेशी सब्जी का उपयोग नहीं किया जाता। यहाँ केवल पारंपरिक और देशी सामग्री के उपयोग का कठोर नियम है:

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