
Rama Devi Sahu
114 days ago
*आज की रोचक कहानीया* *आध्यात्मिक दृष्टि* एक व्यक्ति लाहौर से कीमती रूहानी इत्र लेकर आया था। उसने सुना था कि वृन्दावन में संत श्री हरिदास जी महाराज और बांके बिहारी जी के दर्शन करने से बड़ा पुण्य मिलता है। उसके मन में आया कि वह बिहारी जी को यह इत्र भेंट करे। यह इत्र बहुत ही खास था। अगर बोतल को उल्टा कर देंगे तो भी इत्र धीरे-धीरे गिरेगा और इसकी खुशबु लाजवाब होती थी। वह व्यक्ति वृन्दावन पहुँचा और संत जी के पास गया। उस समय संत जी एक भाव में डूबे हुए थे। वह देखते हैं कि राधा-कृष्ण दोनों होली खेल रहे हैं। जब उस व्यक्ति ने देखा कि संत जी ध्यान में हैं, तो उसने वह इत्र की शीशी उनके पास में रख दी और पास में बैठकर संत की समाधी खुलने का इंतजार करने लगा। तभी संत देखते हैं कि राधा जी और कृष्ण जी एक दूसरे पर रंग डाल रहे हैं। पहले कृष्ण जी ने रंग से भरी पिचकारी राधा जी के ऊपर मारी। और राधा रानी सिर से लेकर पैर तक रंग में रंग गईं। अब जब राधा जी रंग डालने लगीं, तो उनकी कमोरी (छोटा घड़ा) खाली थी। संत को लगा कि राधा जी तो रंग डाल ही नहीं पा रही हैं, क्योंकि उनका रंग खत्म हो गया है। तभी संत ने तुरन्त वह इत्र की शीशी खोली और राधा जी की कमोरी में डाल दिया। और तुरन्त राधा जी ने कृष्ण जी पर रंग डाल दिया। हरिदास जी ने सांसारिक दृष्टि में वो इत्र भले ही रेत में डाला, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि में वो राधा रानी की कमोरी में डाला। उस भक्त ने देखा कि इन संत ने सारा इत्र जमीन पर गिरा दिया। उसने सोचा कि मैं इतने दूर से इतना महंगा इत्र लेकर आया था, पर इन्होंने तो इसे बिना देखे ही सारा का सारा रेत में गिरा दिया। वह कुछ भी ना बोल सका। थोड़ी देर बाद संत ने आँखें खोलीं। उस व्यक्ति ने सन्त को अनमने मन से प्रणाम किया। अब वो व्यक्ति जाने लगा। तभी सन्त ने कहा- ”आप अन्दर जाकर बिहारी जी के दर्शन कर आएँ।” उस व्यक्ति ने सोचा कि अब दर्शन करें या ना करें क्या लाभ। इन सन्त के बारे में जितना सुना था सब उसका उल्टा ही पाया है। फिर भी चलो चलते समय दर्शन कर लेता हूँ। क्या पता अब कभी आना हो या ना हो। ऐसा सोचकर वह व्यक्ति बांके बिहारी के मन्दिर में अन्दर गया तो क्या देखता है कि सारे मन्दिर में वही इत्र महक रहा है और जब उसने बिहारी जी को देखा तो उसे बड़ा आश्चर्य हुआ। बिहारी जी सिर से लेकर पैर तक इत्र में नहाए हुए थे। उसकी आँखों से प्रेम के आँसू बहने लगे और वह सारी लीला समझ गया। तुरन्त बाहर आकर सन्त के चरणों मे गिर पड़ा और उन्हें बार-बार प्रणाम करने लगा। और कहता है सन्त जी मुझे माफ़ कर दीजिये। मैंने आप पर अविश्वास दिखाया। सन्त ने उसे माफ कर दिया और कहा कि भैया तुम भगवान को भी सांसारिक दृष्टि से देखते हो लेकिन मैं संसार को भी आध्यात्मिक दृष्टि से देखता हूँ। आप सभी का दिन शुभ हो, साथ में मेरा भी शुभ हो.. 🙏🏻😊 *ओम शांति*
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