
Rama Devi Sahu
147 days ago
हे दीनबंधु करुणासिंधु! हे गोविन्द दामोदर माधवेति!हे गोवर्धन गिरिधारी! राधे राधे! 🙏 वसुदेव सुतं देवं कंस चाणूर मर्दनं! देवकी परमानंदं कृष्णं वंदे जगद्गुरूं! ****************************** विचार संजीवनी ************* रात-दिन विचार होना चाहिये ********************** अगर अपना उद्धार करना हो तो सच्ची बात को स्वीकार कर लो कि सब कुछ भगवान् का है। स्वीकार करना या न करना आपकी मर्जी के अधीन है। शरीर को अपना मान लिया, पर यह आपका है नहीं। एक दिन शरीर छूट जायगा, मर जायगा और लोग इसको जला देंगे। जैसे मरने के समय यह आपके साथ नहीं रहेगा, ऐसे अब भी यह आपके साथ नहीं है। इतनी-सी बात स्वीकार कर लो तो सब काम ठीक हो जायगा। आप कह सकते हैं कि हमारेसे स्वीकार नहींहोता। परन्तु यहबात आपके भीतर खटकनी चाहिये कि स्वीकार क्यों नहीं होता ! इस पर आपका वश चलता है क्या ? इसका रात-दिन विचार होना चाहिये। फिर स्वीकार होजायगा।कारण कि सच्ची बात मिट नहीं सकती। दो और दो चार ही होंगे, तीन या पाँच नहीं हो सकते। श्री हरि चरणों में कोटि नमन! सभी प्रभु प्रेमियों को सादर अभिवादन! प्रेम से बोलिए जय श्रीराधेयय! 🙏

Comments (1)

neeraj
Apr 5, 2026
जय श्री कृष्ण
