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Rama Devi Sahu

11 hours ago

✨भगवान श्री कृष्ण के दिव्य प्राकट्य की पावन कथा और रहस्य ⚜️ यह कथा द्वापर युग की है, जब मथुरा पर अत्याचारी राजा कंस का शासन था। कंस ने अपने पिता उग्रसेन को बंदी बनाकर सिंहासन हथिया लिया था और स्वयं को मथुरा का राजा घोषित कर दिया था। प्रजा उसके अत्याचारों से त्रस्त थी। 👑 कंस अपनी चचेरी बहन देवकी से बहुत प्रेम करता था। जब देवकी का विवाह यदुवंशी वासुदेव जी के साथ संपन्न हुआ, तब कंस स्वयं रथ हांककर अपनी बहन को विदा करने जा रहा था। उसी समय आकाशवाणी हुई—"हे मूर्ख कंस! जिस बहन को तू इतने प्रेम से विदा कर रहा है, उसी देवकी की आठवीं संतान तेरा काल बनेगी और तेरा वध करेगी।"यह सुनते ही कंस क्रोध से कांप उठा और देवकी को मारने के लिए तलवार निकाल ली। वासुदेव जी ने उसे शांत करते हुए वचन दिया कि देवकी से उत्पन्न होने वाली अपनी प्रत्येक संतान को वे स्वयं कंस को सौंप देंगे। कंस ने वासुदेव जी की बात मान ली, लेकिन उसने देवकी और वासुदेव जी को मथुरा के एक सुरक्षित और कड़े पहरे वाले कारागार (जेल) में बंद कर दिया। ⛓️ कंस ने एक-एक करके देवकी की छह संतानों को बेरहमी से मार डाला।👹 सातवें गर्भ के रूप में शेषनाग के अंश बलराम जी आए, जिन्हें योगमाया ने रोहिणी जी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया।💥 ✨घनघोर अंधेरी रात और साक्षात् परब्रह्म का प्राकट्य:-✨ घनघोर अंधेरी रात और साक्षात् परब्रह्म का प्राकट्य:फिर वह ऐतिहासिक समय आया। भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि थी। रोहिणी नक्षत्र के साथ चारों ओर घनघोर काली घटाएं छाई हुई थीं, मूसलाधार बारिश हो रही थी और यमुना उफान पर थी। पूरा संसार गहरी नींद में सो रहा था, ठीक उसी आधी रात को मथुरा के अंधकारमय कारागार में साक्षात् परब्रह्म, भगवान विष्णु ने अपने चतुर्भुज रूप में अवतार लिया। कारागार का कोना-कोना उनके दिव्य प्रकाश से जगमगा उठा। भगवान ने वासुदेव और देवकी को दर्शन दिए और कहा कि वे उन्हें तुरंत गोकुल में नंदबाबा के घर छोड़ आएं और वहां जन्मी कन्या (योगमाया) को मथुरा ले आएं। ✨जब कारागार के द्वार अपने आप खुल गए:-✨ जब कारागार के द्वार अपने आप खुल गए:भगवान के निर्देश देते ही कारागार में एक के बाद एक चमत्कार होने लगे। वासुदेव जी की हाथों और पैरों की बेड़ियां स्वतः ही टूटकर गिर गईं। कड़ा पहरा दे रहे सभी सैनिक गहरी निद्रा में सो गए। जैसे ही वासुदेव जी ने बालक कृष्ण को एक टोकरी में रखकर अपने सिर पर उठाया, कारागार के विशाल और भारी द्वार अपने आप खुलते चले गए। 🛡️💤 मूसलाधार वर्षा के बीच वासुदेव जी उफनती हुई यमुना नदी को पार करने लगे, जहां स्वयं शेषनाग ने आकर भगवान के ऊपर छाते की तरह फन फैलाकर उनकी रक्षा की। यमुना जी ने भी भगवान के चरण स्पर्श कर वासुदेव जी को रास्ता दे दिया।☘️ वासुदेव जी ने गोकुल पहुंचकर बालक कृष्ण को यशोदा मैया के पास सुला दिया और उनकी नवजात कन्या को लेकर वापस मथुरा के कारागार लौट आए।जैसे ही कन्या कारागार में आई, द्वार फिर से बंद हो गए और सैनिकों की नींद खुल गई। कंस को जब आठवीं संतान के जन्म की सूचना मिली, तो वह भागता हुआ आया। उसने जैसे ही उस कन्या को पत्थर पर पटककर मारना चाहा, वह कन्या उसके हाथ से छूटकर आकाश में उड़ गई। वह साक्षात् देवी योगमाया थीं, जिन्होंने हंसते हुए भविष्यवाणी की—"हे मूर्ख कंस! मुझे मारने से क्या होगा? तुझे मारने वाला तो गोकुल में जन्म ले चुका है।"⚡⚔️ 💫💫रहस्य: क्यों चुना भगवान ने आधी रात और जेल का ही समय? अक्सर भक्तों के मन में यह सवाल उठता है कि सर्वशक्तिमान भगवान ने अवतार लेने के लिए किसी महल को छोड़कर जेल और आधी रात का ही चुनाव क्यों किया? इसके पीछे छिपे गहरे रहस्य इस प्रकार हैं:- अंधकार में प्रकाश का संदेश:- आधी रात घने अंधकार का प्रतीक है। उस समय समाज में कंस के पाप, अत्याचार और अधर्म का अंधकार अपनी चरम सीमा पर था। भगवान ने आधी रात को जन्म लेकर यह संदेश दिया कि जब-जब संसार में पाप का अंधकार फैलेगा, तब-तब ईश्वर धर्म के प्रकाश के रूप में प्रकट होकर उस अंधकार को मिटा देंगे।संसार एक कारागार है जेल का रहस्य:- ⛓️ ⛓️ आध्यात्मिक दृष्टि से यह पूरी मानव देह और संसार मोह-माया, काम और लोभ का एक कारागार (जेल) है, जिसमें हम सभी जीव बंधे हुए हैं। भगवान ने जेल में जन्म लेकर यह दिखाया कि वे बंधन में पड़े जीवों को मुक्त कराने आए हैं। 🔱 जैसे उनके आते ही जेल के ताले और बेड़ियां स्वतः टूट गईं, वैसे ही भगवान की शरण में आते ही मनुष्य के सारे सांसारिक बंधन कट जा

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