
Rama Devi Sahu
365 days ago
गोशाला की मात्र एक परिक्रमा करने से चारों धामों का पुण्य फल मिल जाता है। इस धरती पर गोशाला ही सबसे बड़ा देवालय, तीर्थालय और औषधालय है। * तीर्थों में स्नान से जो पुण्य फल प्राप्त होता है, वही पुण्य गौमाता के सरल दर्शन से सहज ही प्राप्त हो जाता है। अतः रोज संभव नहीं हो सके तो, सप्ताह या महीने में हमें गोशाला जरूर ही जाना चाहिए, सपरिवार और बंधु बांधवो सहित। गौमाता केवल एक पशु नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, संस्कार और सनातन धर्म की आधारशिला हैं। गौसेवा, गौपूजन और गौसंरक्षण — यही हमारे जीवन का सच्चा धर्म है। आइए, हम सभी संकल्प लें कि न केवल गौमाता की सेवा करें, बल्कि उनके संरक्षण और सम्मान का भी संदेश समाज तक पहुँचाएँ। कम से कम एक गोमाता के पालनहार भी जरूर ही बनें- गौशालाओं के माध्यम से। !! जय गोमाताजी की !! 🙏 🙏🙏 Jai Gou Mata 🙏🙏

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