
Srikumar महाराज🇮🇳☸️
264 days ago
भगवान के अद्भुत विराट स्वरूप में अनगनित मुख, आँखें, भुजाएँ, उदर देखता है। उनके विराट रूप का कोई आदि और अन्त नहीं है और वह प्रत्येक दिशा में अपरिमित रूप से बढ़ रहा है। उस रूप का तेज आकाश में एक साथ चमकने वाले सौ सूर्यों के प्रकाश से अधिक है

Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!
