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हम चाँद पर पहुँच गए, पर अपने पैरों के नीचे 6,371 किलोमीटर क्या है, वहाँ आज तक नहीं पहुँच पाए। विस्तार से समझते हैं धरती के अंदर की दुनिया: *1. सबसे ऊपर - भू-पर्पटी (Earth Crust)* यही वो जमीन है जहाँ हम रहते हैं। समुंदर के नीचे इसकी मोटाई सिर्फ 5-10 किमी और पहाड़ों के नीचे 70 किमी तक। पूरी धरती के मुकाबले ये एक सेब के छिलके से भी पतली है। *2. दूसरा स्तर - मेंटल (Mantle)* क्रस्ट के नीचे से 2900 किमी तक। यहाँ टेम्परेचर 1000 से 3700 डिग्री तक हो जाता है। ये पूरा पिघला हुआ समुद्र नहीं है, बल्कि बहुत गर्म, गाढ़ी चट्टान है जो बहुत धीरे-धीरे बहती है, जैसे मोम। इसी के बहने से ऊपर की प्लेटें खिसकती हैं और भूकंप, ज्वालामुखी आते हैं। *3. तीसरा स्तर - बाहरी कोर (Outer Core)* 2900 किमी से 5150 किमी तक। ये तरल लोहे और निकल (liquid metal) से बना है। ये लगातार घूमता रहता है। इसी घूमने से धरती का *चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field)* बनता है, जो एक अदृश्य कवच की तरह हमें सूरज की खतरनाक किरणों से बचाता है। *4. सबसे अंदर - आंतरिक कोर (Inner Core)* 5150 किमी से सेंटर तक। यहाँ टेम्परेचर सूरज की सतह जितना - लगभग 5500 डिग्री सेल्सियस है, लेकिन प्रेशर इतना ज्यादा है कि सब कुछ ठोस लोहे की गेंद की तरह जमा हुआ है। इसका साइज हमारे चाँद के 70% जितना है। *तो फिर हमें ये सब कैसे पता चला, जब हम गए ही नहीं?* इंसान ने सबसे गहरी खुदाई रूस में की थी - *कोला सुपरडीप बोरहोल*, सिर्फ 12.2 किमी। उसके बाद ड्रिल पिघलने लगी। इतनी गहराई पर जाना मशीनों के लिए भी नामुमकिन है। हमें सारी जानकारी *भूकंपीय तरंगों (Seismic Waves)* से मिलती है। जब भूकंप आता है तो तरंगें धरती के अंदर से गुजरती हैं। कहीं तेज होती हैं, कहीं धीमी, कहीं मुड़ जाती हैं। उन्हीं बदलावों से वैज्ञानिक समझ जाते हैं कि अंदर ठोस है, तरल है या खोखला। मतलब हम सेंटर तक गए बिना भी, बाहर से ही अंदर का एक्स-रे कर लेते हैं। धरती का सेंटर दिखने में कैसा होगा? कल्पना कीजिए - चारों तरफ घना अंधेरा, आग का समुंदर जो घूम रहा है, और बीच में एक चमकता हुआ ठोस गोला जो सूरज से भी ज्यादा गर्म है। इसके अंदर और भी रहस्य हैं जो वीडियो में नहीं दिखे - *1. अंदर एक और अंदर घूम रहा है* हमारा Inner Core, पूरी धरती से थोड़ा तेज़ घूमता है। वैज्ञानिक कहते हैं कि वो हर 1000 साल में धरती से एक चक्कर ज्यादा लगा लेता है। मतलब धरती के अंदर धरती घूम रही है। *2. सेंटर में सोने का खजाना* वैज्ञानिकों का मानना है कि Inner Core में इतना सोना, प्लेटिनम और लोहा है कि अगर पूरी दुनिया में बाँट दिया जाए तो हर आदमी के हिस्से में करोड़ों टन आ जाए। पर वो कभी बाहर नहीं आ सकता। *3. उल्टा होता है हमारा सुरक्षा कवच* Outer Core के घूमने से जो Magnetic Field बनता है, वो हर 3-4 लाख साल में उल्टा हो जाता है। यानी उत्तर ध्रुव, दक्षिण बन जाता है और दक्षिण, उत्तर। आखिरी बार 42,000 साल पहले ऐसा हुआ था। अगली बार होगा तो हमारे मोबाइल, GPS सब कुछ कुछ दिनों के लिए पागल हो सकते हैं। *4. अगर आर-पार सुरंग खोद दें तो?* अगर आप धरती के एक तरफ से दूसरी तरफ आर-पार सुरंग खोद दें और उसमें कूद जाएं, तो आप बिना किसी इंजन के सिर्फ 42 मिनट में दूसरी तरफ पहुंच जाएंगे। ग्रेविटी आपको खींचेगी। ये ग्रेविटी ट्रेन कहलाती है। *5. हीरों की बारिश* Mantle और Outer Core के बीच जहाँ प्रेशर सबसे ज्यादा है, वहाँ कार्बन दब कर हीरा बन जाता है। वैज्ञानिक कहते हैं कि वहाँ इतने हीरे हैं कि वे कभी-कभी ऊपर आते ज्वालामुखी के साथ निकलते हैं।

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