
Rama Devi Sahu
21 days ago
🌺 रामेश्वरम् ज्योतिर्लिंग की स्थापना का रहस्य 🌺🔱 लंका पर विजय प्राप्त हो चुकी थी। राक्षसराज रावण का वध हो चुका था और माता सीता को मुक्त कराकर प्रभु श्रीराम अयोध्या लौटने की तैयारी कर रहे थे। चारों ओर विजय का उत्सव था, लेकिन श्रीराम के मन में एक गंभीर धर्मसंकट था। रावण अत्याचारी था, लेकिन वह महर्षि विश्रवा का पुत्र और ब्राह्मण कुल में जन्मा था। रावण के वध के कारण श्रीराम पर ब्रह्महत्या का दोष लगा था। इस दोष से मुक्ति पाने के लिए श्रीराम ने भगवान शिव की आराधना करने का निश्चय किया। कथा के अनुसार, समुद्र तट पर श्रीराम ने शिवलिंग की स्थापना करके विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने का संकल्प लिया। शिवलिंग लाने का दायित्व उनके परम भक्त हनुमानजी को सौंपा गया। हनुमानजी भगवान शिव का पवित्र लिंग लाने के लिए काशी की ओर प्रस्थान कर गए। इधर पूजा का शुभ मुहूर्त निकट आता जा रहा था। हनुमानजी के लौटने में विलंब देखकर श्रीराम के सामने कठिन परिस्थिति उत्पन्न हो गई। तभी माता सीता ने समुद्र तट की पवित्र बालू से एक शिवलिंग बनाया। श्रीराम ने उसी शिवलिंग को शुभ मुहूर्त में स्थापित किया और भगवान शिव का विधिपूर्वक अभिषेक एवं पूजन आरंभ किया। यह शिवलिंग आगे चलकर रामलिंग के नाम से प्रसिद्ध हुआ। कुछ समय बाद हनुमानजी भगवान शिव का लिंग लेकर वहाँ पहुँचे। जब उन्होंने देखा कि श्रीराम पूजा पूर्ण कर चुके हैं, तो उन्हें थोड़ा दुःख हुआ कि उनके द्वारा लाया गया लिंग समय पर स्थापित नहीं हो सका। श्रीराम ने प्रेमपूर्वक हनुमानजी को समझाया कि उनकी भक्ति और सेवा व्यर्थ नहीं गई। उनके द्वारा लाए गए शिवलिंग को भी उसी पवित्र स्थान पर सम्मानपूर्वक स्थापित किया गया। यह लिंग विश्वलिंग के नाम से प्रसिद्ध हुआ। कथा के अनुसार, श्रीराम ने हनुमानजी की भक्ति को सम्मान देते हुए यह व्यवस्था की कि पहले हनुमानजी द्वारा लाए गए विश्वलिंग की पूजा की जाएगी और उसके बाद रामलिंग की पूजा होगी। आज भी रामेश्वरम् मंदिर की परंपरा में इस व्यवस्था का विशेष महत्व माना जाता है। इसके बाद श्रीराम ने भगवान शिव से प्रार्थना की कि वे इसी पवित्र सेतुबंध क्षेत्र में सदैव निवास करें और भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखें। श्रीराम की प्रार्थना स्वीकार करके भगवान शिव रामेश्वर नाम से यहाँ ज्योतिर्लिंग रूप में विराजमान हुए। इसी कारण यह पवित्र धाम रामेश्वरम् ज्योतिर्लिंग के नाम से प्रसिद्ध हुआ। समुद्र के किनारे स्थित यह पावन धाम आज भी श्रीराम की शिवभक्ति और भगवान शिव की कृपा की स्मृति को अपने भीतर संजोए हुए है। हर हर महादेव! 🙏🔱

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