
Rama Devi Sahu
109 days ago
“महाप्रभु का प्रेममय महाप्रसाद” 🙏🏻❣️ ⚜️पुरी धाम की पावन सुबह थी। Jagannath Temple के शिखर पर लहराती पताका मानो सम्पूर्ण संसार को भक्ति का संदेश दे रही थी। बड़ा डांडा भक्तों की भीड़ से भरा हुआ था। हर ओर “जय जगन्नाथ” की मधुर ध्वनि गूंज रही थी। ✨उसी समय मंदिर के सामने एक अद्भुत दृश्य दिखाई दिया। स्वयं महाप्रभु जगन्नाथ अपने दिव्य स्वरूप में विराजमान थे। उनके सामने मिट्टी का एक बड़ा पात्र रखा था, जिसमें सफेद-सफेद मधुर रसगुल्ले भरे हुए थे। उनके मुख पर बालक जैसी मधुर मुस्कान थी, जैसे वे अपने भक्तों के साथ प्रेम बाँटना चाहते हों।😮 ✨भीड़ में एक छोटा गरीब बालक खड़ा था। उसके कपड़े पुराने थे, लेकिन उसकी आँखों में प्रभु के लिए असीम श्रद्धा थी। वह दूर से महाप्रभु को देख रहा था और मन ही मन सोच रहा था— “काश! मुझे भी प्रभु का महाप्रसाद मिल जाए।”🤔 ✨महाप्रभु सबके हृदय की भावना जानते हैं। अचानक एक सेवक उस बालक के पास आया और उसे अपने साथ प्रभु के समीप ले गया। बालक काँपते हाथों से खड़ा हो गया। तभी ऐसा लगा मानो स्वयं महाप्रभु ने अपने करकमलों से एक रसगुल्ला उठाकर बालक को दिया हो। ✨जैसे ही वह महाप्रसाद बालक के मुख में गया, उसकी आँखों से आँसू बहने लगे। उसे लगा मानो सम्पूर्ण संसार का सुख उसे मिल गया हो। उस क्षण वहाँ उपस्थित सभी भक्त भावविभोर हो उठे।💞 ✨तभी मंदिर की घंटियाँ जोर से बजने लगीं और आकाश में शंखध्वनि गूंज उठी। सभी समझ गए कि महाप्रभु जगन्नाथ केवल मंदिर में नहीं, बल्कि हर सच्चे भक्त के प्रेम में निवास करते हैं। भक्ति, प्रेम और विश्वास से दिया गया एक छोटा सा प्रसाद भी जीवन को दिव्यता से भर देता है। 🙏🏻✨ 🙏🏻जय जगन्नाथ🚩 #दारुव्रम्ह_जगन्नाथ 🐚🥀🙏🏻

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