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😊 ICU अर्थात्... 'I See You' का रूम जग में सबसे सुंदर जगह अगर कोई है तो वह है _ICU_!! अगर आपके अंदर अहंकार आ गया है तो ICU की रूम देखनी चाहिए और सोचना चाहिए... दो व्यक्तियों के बीच भेद करने वाली कोई भी रेखा यहाँ नहीं होती। आपका धर्म, जाति, वर्ण, श्रीमंत, गरीब...‌ इतना ही नहीं, स्त्री-पुरुष का भेद भी यहाँ नहीं होता!! वह काच का दरवाजा ओलाड़ने के बाद _ICU_ में आते ही सभी भेद जहाँ कपड़े उतारते हैं वहीं गड़बड़ हो जाते हैं... अंदर आता है तो सिर्फ मानव का शरीर...!!! जीवन का अर्थ समझाने वाली लाखों किताबें, ग्रंथ होंगे या जीवन कैसे जीना है यह सिखाने वाले असंख्य गुरु भी होंगे... लेकिन जो अर्थ, जो तत्वज्ञान यहाँ ICU में मिलता है... वह कहीं भी पढ़ने को नहीं मिलता!! जीवन का सही अर्थ यहाँ ही पता चलता है!! इसलिए यह जगह वास्तव में बहुत सुंदर है... एक घर में भूत-प्रेत की अफवाह होती है, किसी ने कभी वहाँ मरने की बात कही होती है, लोगों को वहाँ डर लगता है। कहीं रस्ते पर, बड़े पेड़ के नीचे ऐसी अफवाहें होती हैं, डर होता है। लेकिन यहाँ... यहाँ ICU के एक-एक बेड पर शंभर, दो सौ... असंख्य लोग मर चुके होते हैं!! कोई डर नहीं, कोई अफवाह नहीं। माणस मर गया, बेडशीट बदल गया, दूसरा माणस आ गया... इतना आसान है यहाँ!! हिंदू, ख्रिश्चन, बौद्ध...‌ आस्तिक, नास्तिक जो भी हों, उन सभी के फेफड़ों में एक ही मशीन से ऑक्सीजन जाता है... हम बाहर छोटी-छोटी बातों का विचार करते रहते हैं। किसी को क्या लगेगा, इस विचार में रहते हैं। कपड़े कैसे हैं, लोग हंसेंगे क्या मेरे अवतार पर, बोलने पर, भाषा पर... यहाँ बेड पर उन किसी भी चीजों की कीमत नहीं होती। पुरुष हो या स्त्री... लाज-शरम जैसी चीजों की यहाँ कोई कीमत नहीं होती! समय की सही कीमत भी सबसे ज्यादा यहाँ ही पता चलती है। जब हमें पता चलता है कि हमारी प्रिय व्यक्ति हमें छोड़कर जाने वाली है, तब एक ही चीज दिमाग में होती है... बस एक दिन, एक घंटा, पाँच मिनट और मिल जाए... बाहर की दुनिया में हम असंख्य अपेक्षाएँ लेकर जीते हैं। लोग अपने आप से, दूसरों से... अपेक्षाओं का पहाड़ लेकर चलते हैं। घर, गाड़ी, शिक्षा, नौकरी, प्रेम, व्यवसाय, नातेवाईक, पैसा...‌ असंख्य अपेक्षाएँ! वहाँ सिर्फ एक ही अपेक्षा होती है... एक बार... बस एक बार... आंखें खोलनी हैं...!!!! _जीवन में कभी लगा कि मैं बहुत बड़ा हूँ तो ऐसी जगह जाना चाहिए... अहंकार उतर जाता है!_ _कभी लगा कि मेरे पास कुछ नहीं है, सब कुछ खत्म हो गया है... तब भी जाना चाहिए... पता चलता है कि हमारे पास क्या है!_ निसर्ग ने माणस को बनाते समय जो उद्देश्य सामने रखा होगा, उस स्वरूप का ' _माणस_ ' मुझे यहाँ दिखता है... अर्थात्... _I See You_ _इसलिए यह जगह दुनिया में सबसे सुंदर है!_ सभी धर्म, जाति, भाषा, प्रांत और लिंग के भेदों को नष्ट करने वाला _ICU_...

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