
Rama Devi Sahu
75 days ago
प्रथम अर्धाली (शुरुआती दो पंक्तियाँ): कलम भी उनके हाथ है, नियति उनके वश। व्याख्या: इन पंक्तियों में भगवान गजानन (गणेश जी) की परम सत्ता और उनकी लेखन-शक्ति की महिमा का वर्णन किया गया है। यहाँ कहा गया है कि सृष्टि की सबसे सामर्थ्यवान 'कलम' भगवान गणेश के हाथों में सुशोभित है। वे केवल कला या बुद्धि के ही देवता नहीं हैं, बल्कि इस संपूर्ण संसार की 'नियति' (भाग्य और विधान) भी पूरी तरह से उन्हीं के नियंत्रण और वश में है। वे जैसा चाहते हैं, वैसा ही संसार का विधान निर्मित होता है। द्वितीय अर्धाली (अंतिम दो पंक्तियाँ): गजानन ही लिख सकें, जीवन का नव यश। व्याख्या: मनुष्य अपने पुरुषार्थ से प्रयास तो कर सकता है, परंतु जीवन में वास्तविक और नवीन कीर्ति, सफलता तथा 'यश' की रचना केवल विघ्नहर्ता गजानन की कृपा से ही संभव है। जब उनकी कृपा होती है, तब वे मनुष्य के जीवन के कोरे पन्नों पर भाग्य की कलम से एक नया गौरवशाली अध्याय और यश लिखते हैं। मूल भाव: यह दोहा पूरी तरह से ईश्वर के प्रति समर्पण और उनकी सर्वोच्च शक्ति को रेखांकित करता है। यह याद दिलाता है कि हमारी नियति को नया मोड़ देने और जीवन को सार्थक व यशस्वी बनाने की सामर्थ्य केवल प्रथम पूज्य भगवान गणेश के पास है।
Comments (6)

Rama Devi Sahu
Jun 23, 2026
🙏‼️ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम हरे हरे‼️🙏

Rama Devi Sahu
Jun 23, 2026
🙏‼️ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम हरे हरे‼️🙏

Rama Devi Sahu
Jun 23, 2026
🙏‼️ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम हरे हरे‼️🙏

Pannalal panchal
Jun 23, 2026
जय श्री गणेश

R k jangid phulera Jaipur
Jun 17, 2026
जय हो प्रथम पूज्य देव गौरी पुत्र गणेश जी की श्री गणेश जी की कृपा आपके परिवार पर सदैव बनी रहे🙏

Srikumar महाराज🇮🇳☸️
Jun 17, 2026
Om Gan Ganapataye Namah Vakratunda Mahakaya 🙏
