
shree Rana
137 days ago
***_ _धामा धरती धन्य हुई रे, माँ शक्ति समाई आज..._ _चैतर वद तेरस दिन ऊजळो, रह्यो जग में जस गाज..._ झालावाड़ धरती पे राज करे, हरपालदेव महाराज... राणी शक्ति रूप में जगदंबा, घर-घर पूजे समाज... परणे दिन माँ बोली रे वचन, सुण लो राजा काज... "देवी रूप दीखे जिस दिन से, जाऊँ मैं निज धाम"... _धामा धरती धन्य हुई रे, माँ शक्ति समाई आज..._ झरूखे बैठी माँ राणी सा, नीचे रमता बाल... तीन कुँवर संग चारण छोरो, खेले खळ-खळ ताल... इतने में मदमत्त हाथी आयो, तोड़े गढ़ का जाळ... हाहाकार मच्यो महेलां में, थर-थर कांपे ख्याल... _धामा धरती धन्य हुई रे, माँ शक्ति समाई आज..._ माँ ने लांबो हाथ पसार्यो, पल में लीनी सार... चारण पूत को ताली दे के, दीन्हो दूर किवार... तीन कुँवर हथेली में लेके, झरूखे लियो उतार... देखे लोग तो बोल्या "अरे रे, ये तो जगदंबा अवतार"... _धामा धरती धन्य हुई रे, माँ शक्ति समाई आज..._ जय-जयकार गूँज्यो गढ़ में, वचन आयो माँ याद... माँ चाली गढ़ की रंगे-रंगे, नैनां में भर नीर... संग में उमादे लाड़ली दौड़ी, "माँ मुने ले जा तीर"... माँ ने गोदी बिठाई बेटी, धरती लीनी चीर... _धामा धरती धन्य हुई रे, माँ शक्ति समाई आज..._ जहाँ समाई जगदंबा माँ, पूजे आज समाज... दीवो जले अखंड वहाँ पे, मिटे जगत का दाज... हरपालदेव नयन भर रोवे, भीनी धामा खाज... कहे कथा ये डायरा वाले, सुन लो भाई आज... _धामा धरती धन्य हुई रे, माँ शक्ति समाई आज...* ---

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